कलेक्टर समेत सभी बड़े अधिकारी सरकारी स्कूल में पढ़ाएंगे, आदेश जारी, क्या शिक्षा गुणवत्ता में होगा सुधार

कलेक्टर समेत सभी बड़े अधिकारी सरकारी स्कूल में पढ़ाएंगे, आदेश जारी, क्या शिक्षा गुणवत्ता में होगा सुधार बलौदाबाजार। जिले के हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल में अधिकारी बच्चों को पढ़ाएंगे। कलेक्टर डोमन सिंह ने इसका आदेश निकाला है। इसके साथ ही अधिकारियों की सूची और उनके पढ़ाने वाली स्कूल की सूची जारी की है। कलेक्टर ने अपने निर्देश में कहा है कि अधिकारियों को जिला मुख्यालय के करीब एक हाईस्कूल और हाई सेकेंडरी स्कूल में 3 घंटे का क्लास लेना है। सुबह 11 बजे से 2 घंटे के बीच एक पीरियड अधिकारी लेंगे। सरकारी कर्मचारी आदत से मजबूर, नहीं सुधरेंगे, सप्ताह में 2 दिन छुट्टी का असर नहीं, कार्रवाई के लिए निकालना पड़ा आदेश कलेक्टर डोमन सिंह खुद बलौदाबाजार के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाएंगे। वहीं जिला पंचायत सीईओ फरिहा आलम सिद्दीकी बलौदाबाजार के आत्मा में इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा लेंगे। डीएफओ ,अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, जिला आबकारी अधिकारी, खनिज अधिकारी समेत हर अधिकारियों को स्कूल में क्लास लेने की जिम्मेदारी दी गई है। डीईओ को भी पढ़ाने लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भिलाई इस्पात संयंत्र में ट्रेनिंग, आईटीआई और इंजीनियरिंग डिप्लोमा छात्र के लिए मौका

भाजपा शासनकाल में भी प्रयास

बलौदाबाजार कलेक्टर ने जो आदेश निकाल है, वो पहला प्रयास नहीं है। इससे पहले डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में भी हुआ था। उस समय भी मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, कलेक्टर स्कूल का दौरा कर किया था। इसे शिक्षा गुणवत्ता में सुधार लाने की बात कही गई थी। लेकिन कुछ नहीं हुआ। रमन सिंह ने शिक्षा पाठ्यक्रम को ही कमजोर कर दिया। जिस वजह उससे सत्ता गंवानी पड़ी। भूपेश सरकार में कोरोना काल के पहले ये पहल की गई थी। लेकिन शिक्षा शिक्षा गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं आई। सिर्फ फोटो खिंचाने के लिए मंत्री व अधिकारी जाते हैं। होता कुछ नहीं। अधिकारी के जाने के बाद फिर पुराने तरीके से पढ़ाई होती है। 

सरकारी स्कूल में शिक्षा गुणवत्ता क्यों नहीं?

लोगों का सवाल तो यही है कि आखिर इतना बजट होने के बात भी सरकारी स्कूल में पढ़ाई क्यों नहीं होती है। अगर पढ़ाई होती है तो बच्चे कमजोर क्यों है। क्यों आठवी कक्षा तक के बच्चे सामान्य गणित हल नहीं कर पाते। हिंदी और अंग्रेजी क्यों नहीं पढ़ पाते। इसका जवाब सिस्टम और सिस्टम को चलाने वाले के पास है। लेकिन असलियत में सुधार लाना उद्देश्य नहीं होता।  अब सरकार ने एक बार फिर शिक्षा गुणवत्ता पर पहल की है। देखने वाली बात है कि उद्देश्य पर कितने सफल हो पाते हैं। बीसीसीआई सचिव जय शाह ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को दिया झटका, प्रस्ताव किया खारिज Ind Vs WI : रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत की पहली जीत, विराट ने दिया ये रिएक्शन Our players have understood their roles and responsibilities: Dhoni on turnaroun