भ्रष्टाचार पर सरकार की खानापूर्ति, वकीलों की गिरफ्तारी, लेकिन तहसीलदार का सिर्फ ट्रांसफर
भ्रष्टाचार पर सरकार की खानापूर्ति, वकीलों की गिरफ्तारी, लेकिन तहसीलदार का सिर्फ ट्रांसफर
रायगढ़। राजस्व न्यायलय रायगढ़ में भ्रष्टाचार को लेकर जमकर विवाद हुआ था। इसके बाद तहसीलदार और वकीलों के बीच मारपीट हुई थी। मामले में कुछ अधिवक्ताओं की गिरफ्तारी की गई। इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ कई जिलों में जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया तक को पत्र लिखना पड़ा।
वहीं राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार को प्रश्रय देने का आरोप लगा। अब सरकार ने खानापूर्ति करते हुए तहसीलदार का ट्रांसफर कर दिया है।
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रायगढ़ कलेक्टर ने आदेश जारी कर तहसीलदार सुनील अग्रवाल को धरमजयगढ़ तहसील की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं तहसीलदार धरमजयगढ़ भोज कुमार डहरिया को रायगढ़ का नया तहसीलदार बनाया गया है।
बता दें कि 10 दिन पहले दोनों पक्षों के विवाद हुआ था। इसके बाद तहसीलदारों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। मगर राजस्व कोर्ट को सुरक्षा दिए जाने के बाद तहसीलदारों ने हड़ताल शुक्रवार को स्थगित कर दी। लेकिन वकीलों का भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पिछले 5 दिनों से धरना जारी है। वकीलों का आरोप है कि राज्यभर के राजस्व कोर्ट में भारी भ्रष्टाचार है। इसलिए राजस्व कोर्ट का बहिष्कार जारी रहेगा।
जानें विवाद की वजह
पूरा विवाद 10 दिन पहले हुए वकीलों और राजस्व कर्मचारियों के बीच मारपीट से जुड़ा है। वकीलों ने उस दौरान आरोप लगाया था कि तहसीलदार सुनील कुमार अग्रवाल ने उनके साथ बदसलूकी की है। जिसके चलते ये पूरा विवाद हुआ। घटना के बाद से राज्यभर के तहसीलदार आंदोलन पर चले गए थे। वहीं वकीलों ने भी राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। मारपीट के आरोप में कुछ वकीलों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।
बीजेपी का समर्थन
सोमवार को बीजेपी नेता ओपी चौधरी और कुछ अन्य नेताओं ने वकीलों से मुलाकात की। अंबेडकर चौक में मुलाकात के बाद बीजेपी नेताओं ने वकीलों के आंदोलन का समर्थन कर दिया। ओपी चौधरी ने वकीलों से कहा कि इस आंदोलन में हम आपके साथ हैं।
गिरफ्तार वकीलों को छोड़िए
रविवार को अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील में बोलियां लगती हैं और फैसले बेचे जाते हैं। लोगों की भावनाओं, न्याय और फैसलों की खरीदी-बिक्री होती है। इन स्थितियों में इन कोर्ट का अधिवक्ता लगातार बहिष्कार करेंगे। वकीलों ने कलेक्टर से मिलने से ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि पहले गिरफ्तार वकीलों को रिहा किया जाए तब बात होगी।
इन मांगों को लेकर आंदोलन
- जिला अधिवक्ता संघ रायगढ़ के अधिवक्ताओं के विरुद्ध की गई झूठी एफआईआर वापस ली जाए।
- एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
- राजस्व अधिकारियों से सिर्फ प्रशासनिक कार्य ही कराएं।
- राजस्व अधिकारियों से उनके न्यायिक कार्य को वापस लेकर जिला कोर्ट के क्षेत्राधिकार में लाया जाए।
- सभी राजस्व अधिकारियों व पटवारियों के ऑफिस में सीसीटीवी कैमरा लगवाया जाए, जिसकी मॉनिटरिंग कलेक्टर करें और 24 घंटे में सार्वजनिक हो।
- सभी राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लंबित आपराधिक शिकायत में प्रथम सूचना पत्र पत्र तत्काल दर्ज किया जाए।
- प्रत्येक जिला कार्यालय में EOW के थानों की स्थापना की जाए।
- लोक सेवा केंद्र को समाप्त किया जाए।
- एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू होने तक किसी भी अधिवक्ता के खिलाफ FIR दर्ज होने से पहले अधिवक्ता संघ की सहमति अनिवार्य हो।
- सभी राजस्व अधिकारियों से उनकी संपत्ति की घोषणा कराई जाए
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