बेरोजगारों के साथ भूपेश सरकार की साजिश! कंप्यूटर के जमाने में शीघ्रलेखन सर्टिफिकेट किया अनिवार्य, जानिए सहायक ग्रेड-3 की नौकरी मेें कैसे हो रहा खेला रायपुर। प्रदेश की भूपेश बघेल की सरकार बेरोजगारों के साथ गलत कर रही है। उन्हें नौकरी से दूर रखने साजिश की जा रही है। यह आरोप हम नहीं लगा रहे, बल्कि प्रदेश के बेरोजगार युवा लगा रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने कंप्यूटर के जमाने में टाइपिंग (शीघ्र लेखन) सर्टिफिकेट की मांग की है, वो भी सहायक ग्रेड 3 की नौकरी के लिए। अगर आपको शीघ्र लेखन पास युवक चाहिए तो ऐसे प्रदेश में संचालित डीसीए और पीजीडीसीए की पढ़ाई रोक देनी चाहिए। उसे प्रदेश के युवाओं को बताना चाहिए कि इस कोर्स के साथ शीघ्र लेखन की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। बेरोजगार युवाओं का कहना है कि आज जमाना कंप्यूटर का है। सभी कार्यालय में इसी से काम हो रहा है। सिर्फ कुछ जगह को छोड़ दे तो शीघ्र लेखन का काम नहीं होता। इसकी जरूरत अदालत, कलेक्टोरेट जैसे जगहों पर फैसले को जल्दी लिखने के लिए शीघ्रलेखन सर्टिफिकेट (शॉर्टहैंड) की आवश्यकता होती है। लेकिन अब सहायक ग्रेड 3 के लिए भी इसे अनिवार्य कर दिया गया है। क्या सभी कार्यालयों में इससे काम हो रहा है। आखिर ऐसा फैसला क्यों लिया गया है। इस बारे में युवा अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए इसका विरोध कर रहे हैं। पटवारी के 301 पदों पर भर्ती, देखें शैक्षणिक योग्यता समेत अन्य जानकारी बता दें कि राज्य सरकार ने इस महीने एक आदेश जारी किया है, जिसमें कुछ खास भर्तियों में मान्यता प्राप्त टाइपिंग एंड शॉर्टहैंड बोर्ड से टाइपिंग का प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने पिछले महीने एक सर्कुलर जारी किया। इसमें उन्होंने शीघ्रलेखक, डाटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनोटायपिस्ट और सहायक ग्रेड-3 की भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता फिर से निर्धारित की है। अब डाटा एंट्री ऑपरेटर और स्टेनोटायपिस्ट के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्था अथवा छत्तीसगढ़ शीघ्रलेखन सर्टिफिकेट, मुद्रलेखन परीक्षा परिषद से हिंदी अथवा अंग्रेजी में मुद्रलेखन की गति 8 हजार की डिप्रेशन की गति का प्रमाणपत्र देना होगा। ओड़िशा बॉर्डर पर हादसा, तेज रफ्तार कार पेड़ से टकराई, छत्तीसगढ़ के 6 लोगों की मौत वहीं सहायक ग्रेड-3 के लिए इसी बोर्ड से 5 हजार की डिप्रेशन की गति का शीघ्रलेखन प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया है। टाइपिंग की गति देखने के लिए कौशल परीक्षा अलग से आयोजित करने की भी बात कही गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को सेवा भर्ती नियमों में संशोधन कर यह शर्त अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा बेहद आक्रोशित हैं। उनको लगता है कि यह शर्त लगाकर सरकार ने छत्तीसगढ़ के लाखों बेरोजगारों को सरकारी नौकरी की दौड़ से बाहर कर दिया है।