नवा रायपुर में किसान आंदोलन, पैदल मार्च में एक किसान की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में मौत रायपुर। नवा रायपुर के किसान आंदोलन से एक बुरी खबर सामने आई है। आंदोलन के दौरान एक किसान की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। गौरतलब है कि पिछले दो महीने से भी ज्यादा दिनों से नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) के बाहर धरने पर बैठें हैं। शुक्रवार को इन किसानों का धैर्य जबाव दे गया। अपने हक की बात करने किसान मंत्रालय की ओर बढ़ने लगे। दोपहर के वक्त करीब 2 हजार से ज्यादा किसानों ने पैदल मार्च निकाला। इन किसानों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। कुछ ही दूरी पर किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी। 200 से अधिक पुलिस के जवान सुरक्षा कवच पहने खड़े थे। वे किसानों को डंडे के बल पर रोकने लगे। किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। यह भी पढ़े- नवा रायपुर के किसानों का आज से भूख हड़ताल, सरकार के रवैया से आहत होकर लिया फैसला इसके बाद इस मार्च में शामिल महिलाओं ने बैरिकेड के पास ही सड़क में बैठकर धूप में धरना देना शुरू कर दिया। इसी दौरान बरौदा निवासी बुजुर्ग किसान सियाराम पटेल की तबियत बिगड़ गई। पैदल मार्च कर मंत्रालय घेराव करने के लिए जाने वालों में वे भी शामिल थे। उन्हे तत्काल बाल्को अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। बरौदा गांव के सरपंच सीमा रहीस बंदे ने मीडिया को बताया कि अचानक गिर जाने के बाद सभी लोग सियाराम पटेल को पास ही स्थित बालको अस्पताल लेकर गए। जहां उनकी मौत हो गई। बता दें कि रायपुर कलेक्टर सौरभ कुमार ने मंत्रालय और आसपास के 100 मीटर के दायरे में चारों तरफ से आने वाली सड़कों पर धारा 144 लागू कर दी। अब किसानों ने मंगलवार से 5 किसान आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। गुरुवार को इनमें से एक किसान राजकुमार पटेल ने पानी पीना भी छोड़ दिया है। वहीं भारत दास मानिकपुरी, दुकालू राम सिन्हा, जगत राम सोनवानी और जगतू राम पटेल भी कुछ नहीं खा रहे हैं। समिति के मुताबिक स्वास्थ्य परीक्षण में अभी उनकी स्थिति सामान्य बनी हुई है। क्रमिक भूख हड़ताल में महिलाएं भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, दीपा वर्मा, गीता ध्रुव, राखी की रमशिला साहू, वीणा बाई साहू, पलौद की किरण साहू, सोनवती धीवर, परसदा की रानीबाई घृतलहरे, सुमित्रा बाई चंद्राकर, उपरवारा की गंगाबाई धीवर उपवास पर बैठी थीं। बता दें कि नवा रायपुर बनाने के लिए हुए अधिग्रहण से प्रभावित गांवों के लोग 3 जनवरी से 8 मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। इनमें से अधिकांश मांगों पर पूर्ववर्ती सरकार के समय सहमति के बावजूद काम नहीं हुआ था। अभी सरकार कह रही है कि वे 6 मांगों पर काम शुरू कर चुके हैं। किसान इसे अधूरा बता रहे हैं।