नये जिले की राजनीति : भाटापारा को जिला बनाने की मांग,शिवरतन शर्मा ने विधानसभा में पेश किया अशासकीय संकल्प, जानें क्या हुआ
नये जिले की राजनीति : भाटापारा को जिला बनाने की मांग,शिवरतन शर्मा ने विधानसभा में पेश किया अशासकीय संकल्प, जानें क्या हुआ
रायपुर। बलौदाबाज़ार-भाटापारा एक संयुक्त जिला है। लेकिन स्थानीय नेता भाटापारा को जिला बनाने की मांग लगातार कर रहे हैं। यहां के स्थानीय विधायक लगातार इस मांग को उठा रहे हैं। इस विधायक की सक्रियता की वजह से ही जिले में भाटापारा का नाम जोड़ा गया है। आज उन्होंने विधानसभा में भाटापारा को ज़िला बनाने के लिए अशासकीय संकल्प पेश किया। जिस पर मत विभाजन किया गया। मत विभाजन के बाद प्रस्ताव खारिज हो गया।
दरअसल, भाटापारा विधायक शिवरतन शर्मा ने शुक्रवार को अशासकीय प्रस्ताव पेश किया। ध्वनिमत से फ़ैसले के ठीक पहले विधायक शिवरतन शर्मा ने मत विभाजन की माग रखी, जिसे आसंदी से उपाध्यक्ष मनोज मंडावी ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, जिसमें 45 ने विपक्ष में और 12 मत पक्ष में मत पड़ा। इस पर प्रकार 45 के मुकाबले 12 मत से प्रस्ताव खारिज हो गया।
शिवरतन शर्मा का आरोप
अशासकीय संकल्प पर बोलते हुए शिवरतन शर्मा ने कहा कि नंद कुमार पटेल से लेकर टी एस सिंहदेव और भूपेश बघेल तक ने भाटापारा को नया ज़िला बनाने को लेकर सहमति और वादा किया था। यदि यह अशासकीय संकल्प ख़ारिज होता है तो यह माना जाएगा कि आप सभी ( सत्ता पक्ष ) अपने वादे से मुकर गए हैं"
क्या है अड़चन
बलौदाबाजार और भाटापारा की दूरी ज्यादा नहीं है। कम समय में ही जिला मुख्यालय पहुंचा जा सकता है। लोगों को इसमें कोई परेशानी नहीं है। बात रेलवे लाइन की आती है, तो सिर्फ इसी वजह से नया जिला नहीं बनाया जा सकता। ऐसा जानकारों का कहना है। आगे कहते हैं कि नया जिला बनाने में भारी सेटअप और प्रशासनिक कार्यों में अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ता है। वहीं सरकार ने बलौदाबाजार से कुछ इलाकों को अलग कर सारगढ़-बिलाईगढ़ के नाम से नया जिला बना दिया है। इससे क्षेत्रफल भी कम हो गया है।
विधायक शिवरतन शर्मा को भाजपा कार्यकाल में जिला बनवाना था
भाटपारा को शुरू से ही जिला बनाने की मांग की जाती रही है। लेकिन जब नए जिले बनाने की बारी आई, तब डॉ रमन सिंह की सरकार ने ही बलौदाबाजार को नया जिला बनाने का निर्णय लिया। उस समय विधायक शिवरतन शर्मा ने इस पर आपत्ति की। जिस वजह से भाटापारा-बलौदाबाजार के नाम से संयुक्त जिला बनाया गया। लेकिन मुख्यालय बलौदाबाजार में है, भाटापारा सिर्फ नाम का है। यहां रेलवे लाइन है, व्यापारिक केंद्र है। लेकिन बलौदाबाजार में कई सीमेंट प्लांट है। यहां भी रेलवे लाइन आने वाला है।
स्थानीय लोगों का कहना था कि जब भाजपा सरकार में नया जिला बनाया गया, उस समय तो भाजपा की सरकार थी। सरकार ने तो सोच समझ कर ही बलौदाबाजार को जिला बनाया होगा। लेकिन विधायक शर्मा अपने सरकार में ही भाटापारा को जिला नहीं बनवा पाए, अब दूसरे सरकार से जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। इसी तरह जब शाखा नहर विस्तार को लेकर चर्चा थी, तब विधायक की भूमिका को कोई नहीं भूल सकता। यह सिर्फ विशुद्ध राजनीति है, कांग्रेस के नेताओं को स्पष्ट करना चाहिए वे वादा क्यों किये जब पूरा नहीं कर सकते। क्या वे राजनीति के बिछाए जाल में फंस गए।
छोटे राज्य में कितने जिले?
छत्तीसगढ़ की गिनती छोटे राज्यों में होती है। इसका अधिकतर भू-भाग जंगल है। अगर ऐसे ही छोटे-छोटे जगहों को राजनीति के चलते जिला बनाते गए तो सरकार पर खर्च का बोझ बढ़ जाएगा। कांग्रेस सरकार ने सक्ती, सारगढ़-बिलाईगढ़, मोहला-मानपुर और मनेन्द्रगढ़ को नया जिला बनाकर राजनीति को हवा दिया है। अब भाटापारा, देवभोग समेत ऐसे कई जगहों से नए जिले बनाने की आवाज तेज हुई है।
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