केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भर्ती के लिए CUET पास होना अनिवार्य, UGC ने दिया परीक्षा अपडेट

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भर्ती के लिए CUET पास होना अनिवार्य, UGC ने दिया परीक्षा अपडेट नई दिल्ली। 12वीं के बाद देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों (central university) में शिक्षा लेने की इच्छा रखने वालों छात्रों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। अब इन विश्वविद्यालयों में 12वीं के अंक के आधार पर नंबर नहीं मिलेगा। हालांकि इसके लिए न्यूनतम अंकों की जरूरत पड़ेगी लेकिन अब ज्यादा नंबर की प्रथम वरीयता अब खत्म हो जाएगी क्योंकि यूजीसी (UGC) अब सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए एक परीक्षा (CUET) आयोजित कर रहा है। इस परीक्षा में पास होने वाले परीक्षार्थियों को ही डीयू, बीएचयू, छत्तीसगढ़ के गुरुघासीदास केंद्रीय विवि समेत अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन में दाखिला मिलेगा। सोमवार को इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University grant commission-UGC) ने घोषणा की। यूजीसी ने बताया कि कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी सीयूईटी (Common University Entrance Test -CUET) में प्राप्त अंकों के आधार पर ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला मिलेगा। देश भर में जितने भी केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, सबके लिए एक ही परीक्षा आयोजित की जाएगी। इससे पहले 12वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर दाखिला मिलता था, जिससे राज्य बोर्डों और ग्रामीण छात्रों को देश के प्रतिष्ठिक कॉलेजों में दाखिला मिलने में दिक्कत होती थी। जुलाई में इसी साल से परीक्षा यूजीसी ने कहा है कि 2022-23 सत्र से ही कॉमन एंट्रेंस टेस्ट लिया जाएगा। इस परीक्षा के आधार पर केंद्रीय विश्वविद्यालय और इससे अंगीभूत कॉलेजों में छात्रों को ग्रेजुएशन में एडमिशन मिलेगा। हालांकि केंद्रीय विश्वविद्यालयों को अपने विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए बोर्ड परीक्षा में प्राप्त एक न्यूनतम प्रतिशत को अपनाने का अधिकार होगा। यानी विश्वविद्यालय यह तय कर सकता है कि 12वीं में इतने प्रतिशत से कम अंक वाले छात्रों को हम दाखिला नहीं देंगे। हालांकि तब भी उसे सीयूईटी देना होगा। ऑडियो-विजुअल या परफॉर्मिंग आर्ट (audio-visual or performing arts) या एक्स्ट्रा करिकुलर और स्पोट्र्स कैटगरी में दाखिले के लिए यूनिवर्सिटी प्रैक्टिकल या ट्रायल को आधार बना सकती है।  12वीं एनसीईआरटी का सिलेबस आधार यूजीसी ने इस प्रवेश परीक्षा के नाम में से केंद्रीय विश्वविद्यालय शब्द को हटा दिया ताकि अगर डीम्ड या निजी विश्वविद्यालय चाहे तो इस परीक्षा में शामिल हो सकता है और इसी परीक्षा के आधार पर अपने संस्थानों में छात्रों को दाखिला दे सकता है। कंप्यूटर आधारित यह परीक्षा जुलाई के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी और इसका सिलेबस सीबीएसई में एनसीईआरटी पर आधारित होगा। लेकिन इस फैसले से राज्य बोर्ड के छात्रों को नुकसान होगा। 12वीं के नंबर को दाखिले में भार नहीं देने के फैसले पर यूजीसी के नवनियुक्त चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने बताया कि यह कोई नई चीज नहीं है। उन्होंने कहा कि आईआईटी अपने यहां दाखिले के लिए जेईई की परीक्षा पहले से ले रही है। इससे विविधता आती है।  परीक्षा इस पैटर्न पर होगी यूजीसी के अध्यक्ष जगदीश कुमार ने बताया कि परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित होगी। पहली शिफ्ट में अनिवार्य लैंग्वेज टेस्ट, दो दिए गए विषय और सामान्य परीक्षा होगी। दूसरी शिफ्ट में चार विषय होंगे और एक भाषा की परीक्षा होगी। यह भाषा 19 भाषाओं में से एक होगी जिसे विद्यार्थी खुद चुनेंगे। आरक्षण की नीति पर असर नहीं  जगदीश कुमार ने बताया कि इस परीक्षा से आरक्षण नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दाखिले के लिए आपको सीयूईटी (CUET) के स्कोर की जरूरत होगी। अगर कोई विश्वविद्यालय स्थानीय छात्रों के लिए सीटों का एक निश्चित प्रतिशत सुरक्षित रखता है तो वह भी प्रभावित नहीं होगा। इसमें अंतर केवल इतना होगा कि अन्य सभी छात्रों की तरह स्थानीय छात्र या आरक्षित वर्ग के छात्र भी सामान्य प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही आएंगे। यह भी पढ़े- लाइनमैन भर्ती मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 3 हजार की भर्ती विज्ञापन पर दिया आदेश सेना में 10वीं पास युवाओं के लिए निकली भर्ती, जानिए डिटेल में “A Lot Of Ravindra Jadeja”: Watch Shaheen Afridi Bowl Left-Arm Spin In Nets, Video Goes Viral