आयुर्वेदिक विधि से तालाब निस्तारी योग्य बना, लोगों ने ली राहत की सांस

आयुर्वेदिक विधि से तालाब निस्तारी योग्य बना, लोगों ने ली राहत की सांस सत अंजोर डॉट कॉम, रायपुर। ग्रामीण परिवेश में आज भी तालाबों का अत्यधिक महत्व है। जनता की निर्भरता पूरी तरह से तालाबों में निर्भर रहती है । नहाने से लेकर दैनिक जीवन के हर काम इसी तालाबों पर ही निर्भर करते हैं। इनका शुद्ध और निस्तारी के लिए उपयुक्त होंना इनके जीवन में अत्यधिक महत्व रहता है। पेयजल की पर्याप्त जलापूर्ति मानव जीवन की प्राथमिक आवश्यकता है। आज भी विश्व में लाखों लोग इससे वंचित हैं। नदियों, झीलों तथा तालाबों का जल प्राकृतिक, मानवीय तथा अन्य प्रकार के अवशिष्टों से प्रदूषित हो गया है। दिन-प्रतिदिन बढ़ते औद्योगीकरण तथा अधिक कृषि उत्पादन के लिये रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से भी जल प्रदूषित होता जा रहा है। विश्वभर में ताजे एवं शुद्ध जल के स्रोतों को केवल अत्यधिक दोहन तथा निम्न स्तर के प्रबंधन से ही खतरा नहीं है। अपितु पारिस्थतिक तंत्र के गिरते स्तर से बहुत अधिक खतरा है। जल ही जीवन है ।ब्रह्मांड के किसी भी ग्रह पर सबसे पहले यह देखते है कि पानी है , क्योंकि तभी वहां जीवन होगा। पंच तत्त्व ही निर्गुण ईश्वर का साकार भगवान रूप है - भूमि, गगन, वायु, अग्नि और नीर ।पांचों तत्त्व में जल ही सूत्रधार है जो सभी को पोषित करता है। जल का जीवन चक्र ही पर्यावरण का मूल आधार है, जो भूमि और वायु को जीवित रखता है। आयुर्वेद में पांचों तत्त्वों को पोषित कर जीवन के तीन मूल भूत विकारों (वात, पित, कफ) का सामंजस्य बनाया जाता है। जिनमें आकाश और वायु तत्त्व अधिक होता है उनकी वात प्रकृति होती है। जिनमें अग्नि तत्त्व ज्यादा होता वे पित्त प्रकृति के होते हैं। कफ प्रकृति में जल और पृथ्वी तत्त्व ज्यादा होता है। एक साम्य स्थिति होती है, जिसमें पांचों तत्त्व समान होते हैं। इसी तथ्य को ध्यान में रखे तो संसार की मौजूदा सभी समस्याओं का इलाज आयुर्वेद में ही है। जल के स्वस्थ होते ही भूमि स्वस्थ होती है और दोनो के स्वस्थ होते ही वायु स्वस्थ होती है और तीनो को अग्नि पोषित करती है तो गगन सभी में समन्वय बनाए रखता है। पर्यावरण को समझे तो उसमे एक का अपशिष्ट दूसरे का भोजन होता है। आयुर्वेद अर्क को बोरवेल के पानी में मिलाकर जब तालाब में डाला जाता है ।तो वही पर्यावरणीय चक्र स्वतः प्रारम्भ हो जाता है। जल के स्वस्थ होते ही भूमि स्वस्थ होती है और रिसाव को प्रारम्भ करती है, जिससे कि पानी का सीधा बहना शुरू हो जाता है।  बहता पानी सड़ता नही हैं। जल चक्र के प्रारम्भ होते ही बाकी चारों- कार्बन , नाइट्रोजन , सलफ़र और फ़ासफ़ोरस स्वतः क्रियान्वित हो जाते है। सृष्टि का चक्र इन्ही पांच के आसपास चलता है, जिसमे पानी ही मुख्य सूत्रधार है। जीवित जल,भूमि और वायु संसार की सभी समस्याओं का समाधान है। ग्रामीण परिवेश में तालाबों की वहां के निवासियों के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है एवं जीवन रेखा है । पर साफ़ निस्तारी योग्य पानी मिलना आज के परिवेश में सबसे कठिन है एवं तालाबों की हालत बदतर है और यही हालत खरोरा ग्राम पंचायत के तालाबों की है। इसी को ध्यान रखते हुए रायपुर कलेक्टर ने सामाजिक संस्था के माध्यम से अभिनव सामाजिक पहल की है और तालाबों को साफ़ एवं निस्तारी योग्य बनाने का बीड़ा उठाया है और इस कार्य में डालमिया ग्रीन वीज़न लिमिटेड की सहयोगी संस्था डालमिया फ़ाउंडेशन ने वित्तीय सहायता मुहैया कराई है । जल प्रदूषण के प्रमुख कारणों में, अनुपचारित अपशिष्ट का निस्सरण औद्योगिक इकाइयों से अनुपचारित निस्सरण, कृषि क्षेत्रों से बहिःस्राव कृत्रिम जैविक पदार्थ के प्रयोग में वृद्धि सम्मिलित हैं। ऐसी परिस्थिति में जल के शुद्धिकरण हेतु टिकाऊ तकनीक की आवश्यकता है। इसी को ध्यान रखते हुए जल के शुद्धिकरण हेतु आयुर्वेदिक तकनीक द्वारा खरोरा - रायपुर में डालमिया फ़ाउंडेशन (Dalmia Foundation) द्वारा गधिया एवं ताला तालाबों का आयुर्वेदिक पद्धति द्वारा जल का शुद्धीकरण, संवर्धन, संरक्षण एवं पीने योग्य बनाने का महत्वपूर्ण कार्य चल रहा है। जिसमें अपेक्षित परिणाम आना शुरू हो चुका है। जो ग्रामीण निवासी इन दोनो तालाबों की बदबू दार पानी में नहाना तो छोड़ समीप जाना भी पसंद नहीं करते थे। आज वहीं के निवासी अब काफ़ी प्रसन्न है , और अब तो नियमित रूप से नहाना एवं अपने जीवन में निस्तारी के लिए भी इसका इस्तेमाल करने लगे हैं । और वहाँ के निवासियों ने कलेक्टर - रायपुर द्वारा उनके इस अभिनव प्रयास के लिए धन्यवाद दिया है। और सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित डालमिया फ़ाउंडेशन के सहयोग से संकल्प सांस्कृतिक समिति के प्रयास से ही चिप - चिपा बदबुदार मटमैला "ग़धिया एवं ताला" तालाब का पानी निस्तारी योग्य हो सका और दोनो तालाबों का शुद्धीकरण अनवरत रूप से जारी है। जहां फ़रवरी महीना आते -आते तालाब सूखने लगते थे और ये तालाब कीचड़ के पानी में तब्दील हो ज़ाया करते थे और और पानी के लिए टैकरों का इंतज़ार करना पड़ता था। पर आज परिस्थिति पहले से काफ़ी सुधरी है और अब दोनो ग़धिया और ताला तालाब में पर्याप्त निस्तारी के लिए साफ़ पानी उपलब्ध है। और यही इस आयुर्वेदिक उपचार की ख़ासियत है जो कि जल संवर्धन का भी कार्य करता है जिससे कि बारहों महीने पानी तालाबों में उपलब्ध रहे। इस अभिनव पहल के लिए कलेक्टर - रायपुर और डालमिया फ़ाउंडेशन की काफ़ी सराहना की है , और कलेक्टर - रायपुर से माँग की है और तालाबों में भी इसी आयुर्वेदिक पद्धति द्वारा पानी का शुद्धीकरण एवं निस्तारी योग्य बनाने का कार्य किया जाय । जिससे ग्रामीण जनता का जीवन सुगम हो सके और पानी के लिए टैकरों पर निर्भर ना रहना पड़े। और रोज़ी -रोटी कमाने के लिए आसानी से काम पर जा सके । जिससे की उनका जीवन सुचारु रूप से चल सके । तालाब शुद्धीकरण का कार्य संकल्प सांस्कृतिक रायपुर द्वारा दोनो तालाबों का शुद्धीकरण संयुक्त रूप से किया जा रहा है। यह भी पढ़े- केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भर्ती के लिए CUET पास होना अनिवार्य, UGC ने दिया परीक्षा अपडेट “A Lot Of Ravindra Jadeja”: Watch Shaheen Afridi Bowl Left-Arm Spin In Nets, Video Goes Viral