कलेक्टर ने रायपुर में लगाया धारा 144, विद्युत संंविदा कर्मचारी संघ को टेंट हटाने की चेतावनी

कलेक्टर ने रायपुर में लगाया धारा 144, विद्युत संंविदा कर्मचारी संघ को टेंट हटाने की चेतावनी रायपुर। कलेक्टर ने राजधानी रायपुर में विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिला प्रशासन ने इसके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 का इस्तेमाल किया है। वहीं विद्युत संंविदा कर्मचारी संघ को नोटिस जारी कर किया है, जिसमें टेंट हटा लेने की चेतावनी दी गई है। ऐसा नहीं करने पर एकतरफा कार्रवाई की बात कही है।  जानकारी के मुताबिक, रायपुर जिला प्रशासन ने 15 दिनों से राजधानी में प्रदर्शन कर रहे विद्युत संविदा कर्मचारी संघ को एक नोटिस भेजा है। इसमें कहा गया है कि आपके विरोध प्रदर्शनों से राजधानी में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। इस धरना प्रदर्शन से आम जनता को कई प्रकार की असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। नोटिस में कहा है कि मजिस्ट्रेट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत रायपुर जिले की सीमा में धरना, रैली और जुलूस आदि प्रतिबंधित कर दिया है। नोटिस में संविदा कर्मियों को अपना धरना खत्म कर टेंट आदि हटा लेने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने की स्थिति में एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। बता दें कि संविदा कर्मियों का प्रदर्शन 10 मार्च से चल रहा है। प्रदर्शनकारी रोज नये तरीकों से विरोध कर अपनी ओर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार को संविदा कर्मियों ने कफन ओढ़कर प्रदर्शन किया। उससे पहले वे घुटनों के बल चलकर और अर्धनग्न होकर प्रदर्शन कर चुके हैं।

नियमितीकरण करने आंदोलन

आंदोलनकारी कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नियमित किया जाए। एक कर्मचारी ने बताया कि 3-4 बार आंदोलन हो चुका है। हर बार आश्वासन दिया जाता है कि नियमितीकरण की मांग पर निर्णय लिया जाएगा। लेकिन अबतक हमारी मांग पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसलिए फिर आंदोलन करने को कर्मचारी मजबूर हो गए। धरना स्थल पर 2 हजार से अधिक कर्मचारी घर परिवार छोड़कर आए हैं। संविदा कर्मियों ने काम का बहिष्कार कर दिया है।

प्रदर्शन स्थल बदलने की मांग

राजधानी रायपुर के बूढ़ातालाब स्थित धरना स्थल पर कई संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन इससे बूढ़ातालाब के पास जाम की स्थिति निर्मित हो रही है। ऐसे में लोगों बूढ़ातालाब से धरना स्थल हटाने की मांग कर रहे हैं। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना न पड़े। वहीं आंदोलन कारियों को दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जाऩा चाहिए, जिससे उनका लोकतांत्रिक हक का हनन न हो। अगर एकतरफा कार्रवाई होती है तो प्रशासन पर सवाल उठेगा।