सलवा जुडूम प्रभावित आदिवासियों के सामने पुनर्वास की समस्या, मुख्यमंत्री भूपेश ने दिलाया भरोसा

सलवा जुडूम प्रभावित आदिवासियों के सामने पुनर्वास की समस्या, मुख्यमंत्री भूपेश ने दिलाया भरोसा रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज सलवा जुडूम प्रभावित आदिवासियों से मुलाकात की। इस मुलाकात में सकारात्मक परिणाम निकल कर सामने आया है। आदिवासियों की मांग पर प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने कहा है कि “छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा से विस्थापित तेलंगाना और आंध्र प्रदेश गए छत्तीसगढ़ के लोग यदि वापस आना चाहते हैं, तो राज्य सरकार उनका दिल से स्वागत करने को तैयार है। कार्ययोजना बनाकर उन्हें पुनर्वास के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जाएगा।” सलवा जुडूम प्रभावित आदिवासियों के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री के साथ बातचीत की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उनके किसी स्थान पर बसने और कृषि के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने उनके आग्रह पर कहा कि “छत्तीसगढ़ वापस आने के इच्छुक लोगों को जमीन देने के साथ ही उन्हें राशन दुकान, स्कूल, रोजगार में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।”रमु

मुख्यमंत्री ने क्यों मुलाकात की

छत्तीसगढ़ के सलवा जुडूम प्रभावित आदिवासी बड़ी संख्या में तेलंगाना में बसे हैं। यहां सब घर, खेती की जमीन छोड़कर तेलंगाना में जीवन बसर कर रहे हैं। अब वहां से उन्हें भगाया जा रहा है। ऐसे में उनके सामने जीवन निवार्ह की समस्या आ गई है। आदिवासियों की यह तकलीफ मीडिया में प्रमुखता दिखाया। इसके बाद ही मुख्यमंत्री प्रभावित आदिवासियों से भेंट की। उनकी तकलीफों से अवगत हुए।  

एक अच्छी शुरुआत, लेकिन पुनर्वास योजना हो – शुभ्रांशु चौधरी

सामाजिक कार्यकर्ता शुभ्रांशु चौधरी ने बातचीत के बाद मीडिया को बताया कि मुख्यमंत्री ने आदिवासियों की मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जो भी आदिवासी छत्तीसगढ़ वापस लौटना चाहते हैं उनसे उनका प्रदेश स्वागत किया जाएगा। नौकरी और जमीन वाली बात पर उन्होंने कहा कि अभी प्रदेश में आत्मानंद स्कूल जैसी कई योजनाएं हैं जिनमें योग्य आदिवासियों को नौकरी निश्चित तौर पर दी जाएगी। इसके साथ ही कृषि योग्य जमीन और जंगल की जमीन भी आदिवासियों को दी जाएगी। पेंशन दृष्टा सम्मान, सीएम भूपेश बोले- कर्मचारी संगठनों को जल्द मिलेगी नई खुशखबरी इसके साथ ही शुभ्रांशु ने बताया कि अभी भी कई ऐसे विस्थापित परिवार हैं जो तेलंगाना या आंध्र प्रदेश में ही रहना चाहते हैं, वापस नहीं लौटना चाहते। अब एक अच्छी शुरुआत होने के बाद केंद्र सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी कि वह विशेष पुनर्वास योजना बनाकर विस्थापित आदिवासी जो वापस नहीं लौटना चाहते हैं उनकी वापसी कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

सलवा जुडूम क्या?

बस्तर के घने जंगल इलाके में नक्सली राज है। यहां नक्सली बंदूक के दम पर डर का माहौला बनाए हुए हैं। इस काम में उनका साथ नहीं देने पर आदिवासियों को प्रताड़ित करते हैं। वहीं इन नक्सलियों से मुकाबले के लिए उस वक्त की भाजपा सरकार ने आदिवासियों को हथियार उठाने की छूट दी थी। और गांवों के हजारों आदिवासियों को कैंप में स्थापित किया गया। इस नीति का समर्थन उस वक्त के कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने किया। माना जाता है कि कर्मा ही सलवा जुडूम के नेतृत्व कर्ता थे। वहीं दूसरी ओर सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध हुआ। सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा आदिवासी भाई को आदिवासी से लड़ाने की बात कही गई। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। वहां सरकार को जमकर लताड़ लगाई गई। कहा कि एक इंसान को सशस्त्र उठाने की छूट कैसे दी जा सकती है। कोर्ट ने सरकार को सलवा जुडूम बंद करने का फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद आदिवासी कहीं के नहीं रहे। गांव वापस जाते तो नक्सली प्रताड़ित करते। कैंप दो बंद हो गए।  इसलिए पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का रूख किया। अब वहां भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नवा रायपुर किसान आंदोलन, किसानों ने प्रदर्शन तेज करने का किया ऐलान, दर्जनभर संगठन हुए एकजुट “A Lot Of Ravindra Jadeja”: Watch Shaheen Afridi Bowl Left-Arm Spin In Nets, Video Goes Viral