नवा रायपुर में किसानों का आंदोलन समाप्त, सरकार ने निकाला टेंट

नवा रायपुर में किसानों का आंदोलन समाप्त, सरकार ने निकाला टेंट रायपुर। नवा रायपुर के एनआरडीए परिसर में नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति 3 महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे थे, जिसे प्रशासन ने आज खत्म करा दिया। इससे पहले सरकार ने शनिवार सुबह विद्युत संविदा कर्मचारियों के धरना प्रदर्शन को बल पूर्वक समाप्त कराया था।  जानकारी के अनुसार, पुलिस रविवार सुबर साढे 3 बजे धरना स्थल पहुंची। सुबह किसानों की संख्या कम थी। पुलिस ने सभी को उठा लिया।इसके बाद किसानों के टेंट, लाइट साउंड और मंच के सामग्री को कब्जे में ले लिया। प्रशासन के इस कार्रवाई का किसानों ने विरोध किया। किसान नेताओँ का आरोप है कि पुलिस उन्हें अज्ञात जगह लेकर आई है।  जनसंपर्क विभाग द्वारा विज्ञप्ति में कहा गया है कि समय समय पर लोगों को बुलाकर बड़ी संख्या में रैली निकालकर सामान्य व्यवस्था को बाधित भी किया जाता रहा है। संघर्ष समिति की कई मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर कई सकारात्मक निर्णय लिए जाकर इम्प्लमेंटेशन भी प्रारम्भ किया जा चुका है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ पूर्व में कई लेवल पर चर्चा कर धरना समाप्त करने भी मौखिक और लिखित रूप से कहा गया है।

किसान की मौत की जिम्मेदारी पदाधिकारियों पर डाली

पिछले दिनों आंदोलन के दौरान एक ग्रामीण की मृत्यु हुई थी। दंडाधिकारी जांच में यह पाया गया कि पदाधिकारियों के द्वारा बिना अनुमति, बिना पर्याप्त व्यवस्था के प्रदर्शन आयोजित करने एवं लापरवाही पूर्ण एवं ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैए के कारण ही किसान की मृत्यु हुई है। बिना अनुमति के चल रहे धरने को समाप्त कराने की अनुशंसा भी की गई है। 2 दिवस पूर्व भी एनआरडीए परिसर से धरना समाप्त करने हेतु पदाधिकारियों को नोटिस दिया गया है। आज सुबह प्रशासन एवं पुलिस की टीम द्वारा एनआरडीए परिसर जाकर संघर्ष समिति के उपस्थित सदस्यों को  परिसर में लगाए गए टेंट एवं लाउडस्पीकर को हटाने कहा गया। स्वयं से टेंट हटाने की समझाईश दी गई परंतु सदस्यों द्वारा मना किया गया। मैजिस्ट्रेट की उपस्थिति में अमले द्वारा अनाधिकृत टेंट को हटाया गया और सामग्री जब्त की गई है।

तीन जनवरी से शुरू हुआ था आंदोलन

नवा रायपुर बसाने के लिए भूमि अधिग्रहण से किसान प्रभावित हुुए। इसके खिलाफ किसान 3 जनवरी से आंदोलन शुरू किया था। आठ मांगे सरकार के सामने रखी। इन मांगों पर चर्चा की गई। लेकिन दोनों में आम सहमति नहीं बनी। लेकिन सरकार का दावा है कि 6 मांगों को मान लिया गया है। वहीं किसानों का कहना है कि उनकी केवल तीन मांगों पर आधा अधूरा आदेश जारी हुआ है। सरकार उनकी पूरी बात नहीं मान रही है। ऐसे में मांग पूरी होने तक वे आंदोलन से नहीं हटेंगे। बता दें कि इस आंदोलन को समर्थन देने 27 अप्रैल को किसान नेता राकेश टिकैत आने वाले थे।