महामाया मंदिर में बटुकों का हुआ उपनयन संस्कार, बताया जनेऊ धारण करने के नियम रायपुर। राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर में शुक्रवार को 61 बटुकों का जनेऊ संस्कार कराया गया। बटुकों को जनेऊ धारण करने के नियम बताया गया। साथ ही इसका महत्व भी बताया गया। बिना जनेऊ धारण किए किसी भी हवन, यज्ञ का फल नहीं मिलता। जनेऊ धारण करने से सात्विकता, ईश्वर के प्रति आस्था और ब्राह्मणत्व के गुणों का विकास होता है। भिक्षा मांगने की रस्म महामाया मंदिर के सत्संग हाल में समग्र ब्राह्मण परिषद छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में शुक्रवार को बटुक संस्कार का आयोजन किया गया। आचार्यगणों ने देवी-देवताओं का आह्वान किया और स्वजन ने अपने परिवार के बटुकों को तेल, हल्दी लगाने की रस्म निभाई। जनेऊ संस्कार में निभाए जाने वाले नियमों का पालन करने का संकल्प दिलाया। सभी बटुकों का मुंडन करवाकर, मंत्रोच्चार के साथ जनेऊ धारण करवाया। इसके बाद बटुकों ने हवन में आहुति दी। बटुकों ने अपने स्वजन से भिक्षा मांगने की रस्म भी निभाई। शाम को धूमधाम से बटुकों की बरात निकाली गई। बरात आसपास के इलाकों से होकर वापस सत्संग भवन पहुंची। इस दौरान सामूहिक भोजन प्रसादी का आयोजन भी किया गया। कोरोना काल में उपनयन संस्कार नहीं हुआ संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डा. भावेश शुक्ला 'पराशर ने बताया कि पिछले साल 14 मई 2021 को आयोजन होना था, इसमें 51 बटुकों ने पंजीयन करवाया था। इस आयोजन को कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। इस साल बटुकों की संख्या बढ़ाकर 61 कर दी गई। जनेऊ संस्कार के व्यक्तिगत आयोजन में हजारों, लाखों रुपये खर्च होते हैं। सामूहिक आयोजन से खर्च का बोझ नहीं पड़ा। इन नियमों का करना होगा पालन