आंदोलन के 50 दिन : मनरेगा कर्मचारी बोले- पहले साल किसानों का, दूसरे साल कर्मचारियों का, लेकिन साढ़े तीन साल बीत गए सरकार
आंदोलन के 50 दिन : मनरेगा कर्मचारी बोले- पहले साल किसानों का, दूसरे साल कर्मचारियों का, लेकिन साढ़े तीन साल बीत गए सरकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ अपनी मांग को लेकर धरना स्थल पर डटे हुए है। सोमवार को आंदोलन के 50 दिन पूरे होने पर फिर अपनी ताकत दिखाई। राजधानी रायपुर के बूढ़ातालाब स्थित धरना स्थल पर हजारों की संख्या में कर्मचारी जुटे और अपनी आवाज बुलंद की। आंदोलनकारियों ने कहा कि कांग्रेस अपने चुनावी घोषणा पत्र में नियमितिकरण का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के साढ़े तीन साल बाद भी वादा पूरा नहीं हुआ है। जिससे सभी मनरेगा कर्मचारी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। सरकार घोषणा करके भूल गई है।
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संघ के प्रवक्ता सूरज सिंह ने बताया कि आंदोलन 23 मई को पूरे 50 दिन हो गए। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला कर्मचारी आंदोलन है, जिन्होंने गांधीवादी तरीके से 400कि. मी. की पदयात्रा कर राज्य के कर्मचारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। राज्य के पूरे कर्मचारी इस आंदोलन पर अपनी नजरे टिकाए बैठे है। क्योंकि प्रदेश में वर्षों से संविदा कुप्रथा का दंश झेल रहे कर्मचारियों के मन में प्रति वर्ष नौकरी खो जाने के भय के अधेरे में उम्मीद की एक किरण जाग जायेगी और उनके जीवन में एक नये अध्याय की शुरुआत होगी।
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भारी गर्मी में किया पदयात्रा
इन 50 दिनों में इन कर्मचारियों ने कठिनतम सत्याग्रह के तरीकों को अपनाकर शारीरिक और मानसिक रूप से अपने आप को मजबूत बनाया है। इसलिए 42- 45 डिग्री तापमान में 400 कि. मी. पदयात्रा से आए पैरों छाले इनके हौसलों को डगमगा नहीं पाई।
आंदोलन खत्म करने लुभावने हथकंडे
प्रशासन के आंदोलन समाप्त कराने के हथकंडे जब बेअसर नजर आने लगे, तब कमेटी गठन और हड़ताल के 38 दिनों बाद रोजगार सहायकों का मानदेय 5000 रुपए से बढ़ाकर 9540 रू की घोषणा करवा दी गई। यह लुभावनी तरकीब भी बेअसर साबित हुई।
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कमेटी पर उठाया सवाल
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात के दौरान कमेटी की कार्रवाई पर सवाल उठाया था। कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने की बात कही। लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
मुख्यमंत्री से उम्मीद
कर्मचारी चुनावी जन घोषणा पत्र में किए गए वादे के पूर्ण होने की आस के साथ मुख्यमंत्री की ओर नजरे टिकाए हुए है। तमाम घटनाक्रम के बीच ग्रामीण मजदूरों को 1 हजार करोड़ रु की बड़ी राशि जो सीधे उनके खाते में जानी थी, वो नहीं गई। आंदोलन का अंजाम क्या होगा देखा जाना अभी बाकी है।
घोषणा पत्र में नियमितिकरण का वादा
छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर अग्निवंशी ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में नियमितिकरण का वादा किया था, और वहीं वादा आज हम उनको याद दिला रहे हैं। उन्होंने कहा था कि पहले साल किसान का दूसरे साल कर्मचारियों का, लेकिन सरकार वादा करके भूल गई है। लेकिन हम सरकार से नियमितिकरण लेकर रहेंगे।
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