खुशियों की चॉबी मिलने पर छलका दर्द : बड़े बेटे की नक्सली हत्या, मां ने डर से 6 साल की उम्र में पढ़ने आश्रम भेजा, घर भी नहीं आने दिया रायपुर। घर क्या होता है ये मुझे पता ही नहीं है। मैंने 21 साल की उम्र तक सिर्फ डर देखा है । डर की वजह से 6 साल की उम्र से मेरी मां ने घर आने ही नहीं दिया। साल 2005। मैं 6 साल का था जब नक्सलियों ने पूरा घर तबाह कर दिया। लूट का ऐसा तांडव मचाया कि घर से गाय, बकरी, कपड़े, बर्तन यहां तक कि नमक तक लूटकर ले गये। घर में सिर्फ दरवाजा और चार दीवारें ही बची रहीं। अगले दिन हमारे पास पहनने को कपड़े तक नहीं थे। कुछ महीने बाद ही 26 फरवरी 2006 में महाशिवरात्रि थी। बड़े भाई मोहन मंडावी जो एसपीओ थे, तुलार गुफा से शिव जी के दर्शन कर लौट रहे थे उन्हें नक्सलियों ने भरे बाजार में गोली मारकर हत्या कर दी। डर की वजह से मुझे पढ़ाई के लिये 2007 में बालक आश्रम बारसूर, फिर भैरमगढ़ पोटाकेबिन इसके बाद मारडूम भेज दिया। अपनी दास्तां बताते हुये रामनाथ मंडावी की आंखों में आंसू आ जाते हैं। वे बताते हैं कि मैं जिंदा रहूं इसके लिये मां मुझे घर नहीं आने देती थी। जब भी दिल करता हम लोग बाजार में जाकर मिल लेते थे और लिपटकर खूब रोते थे। लेकिन अब रामनाथ मंडावी घर में रहेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दंतेवाड़ा में भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के दौरान आवासीय परिसर के घर की चाबी रामनाथ मंडावी को सौंपी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर नक्सल पीड़ित एवं नक्सल घटनाओं में शहीद परिवारों के लिये दंतेवाड़ा के कारली में सर्व सुविधायुक्त 36 आवास निर्मित किये गये हैं । जिनमें से 30 आवास नक्सल पीड़ित परिवारों को आवंटित कर दिये गये हैं ।