छत्तीसगढ़ विधानसभा : चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज अधिग्रहण विधेयक पर भाजपा ने लाया संशोधन प्रस्ताव, भारी मत से गिरा...

रायपुर। विधानसभा में गुरुवार को चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज अधिग्रहण विधेयक पर संशोधन प्रस्ताव लाया गया। संशोधन प्रस्ताव के पक्ष में 16 मत जबकि विपक्ष में 56 मत पड़े, जिसके बाद संशोधन प्रस्ताव ख़ारिज हो गया। राज्य बनने के बाद पांचवी विधानसभा के कार्यवाही काल में यह पहला मौक़ा है जबकि संशोधन विधेयक पर मत विभाजन की स्थिति आई। दरअसल, चंदूलाल मेडिकल कॉलेज अधिग्रहण विधेयक पर चर्चा के दौरान संशोधन प्रस्ताव भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने दिया। जिसमें यह माँग थी कि, अभी मौजूद कर्मचारियों को अधिग्रहण के बाद भी रखा जाए और देनदारियों को सरकार दे। सरकार की ओर से इस संशोधन प्रस्ताव को नामंज़ूर किया गया। ध्वनिमत के बाद विपक्ष ने डिवीजन की मांग कर दी। भारी मत से यह प्रस्ताव गिर गया. इसके पहले चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज अधिग्रहण विधेयक 2021 पर बीजेपी विधायकों ने अपनी आपत्ति जताई. पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि दुर्ग में छह सौ बिस्तर का इतना बड़ा ज़िला अस्पताल है, उसे अपग्रेड करने में कितना वक़्त लगता। जिस मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण किया जा रहा है, वह पहले ही बिक चुका है। रुंगटा ग्रुप ने इसे 35 करोड़ में ख़रीदा था। ये मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। मेडिकल कॉलेज का मूल्यांकन 20 से 22 करोड़ बस है। नेहरूनगर स्थित कार्पोरेट हॉस्पिटल के नाम से बैंक लोन लिया और कचंदूर में मेडिकल कॉलेज के लिए ज़मीन ली, जबकि कार्पोरेट हॉस्पिटल की ज़मीन सरकारी है. यानी सरकारी ज़मीन को ही सरकार अधिग्रहित कर रही है। यह भी पढ़े- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बड़ी घोषणा, भूमिहीन कृषि मजदूरों को मिलेगा सालाना 6 हजार रुपए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम की अनुमति के बिना बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने मेडिकल कॉलेज की ज़मीन ख़रीदने के लिए बैंक में बंधक रख दिया। ये पूरा मामला न्यायालय प्रक्रिया में फंस कर रह जायेगा। नए मेडिकल कॉलेज के लिए 75 फ़ीसदी हिस्सा केंद्र सरकार देती है। सरकार को मेडिकल कालेज खोलना ही है तो कई मेडिकल कॉलेज खोल सकती है। कांग्रेस विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि छात्र-छात्राओं की चिंता सरकार ने की है। राज्यपाल ने भी सरकार को निर्देश दिया था कि छात्रों की चिंता सरकार करे। नये मेडिकल कॉलेज के लिए पाँच सौ करोड़ रुपये लगते हैं। इस विधेयक के पारित होने के बाद मेडिकल कॉलेज का पूरा प्रशासनिक नियंत्रण, पूरी सम्पत्ति सरकार के पास आ जाएगा। बीजेपी विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि एक कम्पनी के डायरेक्टरों के हितों को पूरा करने के लिए ये विधेयक लाया गया है। छत्तीसगढ़ में पचास से ज़्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो रहे हैं। इस ओर सरकार का ध्यान नहीं है। क्या कोई आकर कहेगा कि मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है तो क्या सरकार उद्योग का अधिग्रहण कर लेगी? सरकार को छात्र हित में सम्पत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार सरकार के पास है। इस विधेयक को लाने का क्या औचित्य? अधिग्रहण को लेकर कल से आपके पास ढेरों आवेदन आयेंगे। वित्तीय ज्ञापन में इस बात का ज़िक्र होना चाहिये कि कितना खर्च अधिग्रहण में आएगा।

राज्यपाल की अनुमति से विधेयक- सिंहदेव

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि राज्यपाल की अनुमति से हम सदन में ये विधेयक ला रहे हैं। ये उचित विधेयक लाया गया है। मुख्यमंत्री ने जनहित में ये घोषणा की थी। हर ज़िले में मेडिकल कॉलेज खुले ये देश की परिकल्पना है। फ़िलहाल हमने विचार किया है कि सभी लोकसभा सीटों में मेडिकल कॉलेज खोले। नौ लोकसभा सीटों में ये आ गया है। दो बाक़ी है। एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना में काम से काम पांच साल लग जाते हैं। यह भी पढ़े- मेडिकल कोर्सेज में OBC और EWS को आरक्षण, इसी सत्र से मिलेगा फायदा

मेडिकल कालेज को 150 सीट सेंशन

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स कई बार आकर मिले। सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए, यहां के सर्वहारा वर्ग, किसान वर्ग, ग़रीब वर्ग को शासकीय उच्च स्तरीय चिकित्सीय लाभ दिलाने के लिए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने के लक्ष्य को लेकर चल रहे हैं। चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज में हम अभी से काम शुरू कर सकते हैं।  एमसीआई से इस मेडिकल कालेज को 150 सीट सेंशन है। इसकी मान्यता ख़त्म नहीं हुई है। ज़ीरो ईयर घोषित की जाती है, मान्यता ख़त्म नहीं होती। ये चालू संस्था है। इसे हमें केवल ज़ीरो ईयर के दायरे से बाहर निकालना है। कम समय में इससे बेहतर विकल्प है ही नहीं। 140 करोड़ रुपये एक साल में इस संस्था को चलाने का अनुमान हमने रखा है। यह वीडियो देखें-