कोरोना महामारी में दिवंगत मनरेगा कर्मचारियों को दी श्रद्धांजलि, परिजन बोले- सरकार ने सामाजिक सुरक्षा का नहीं दिया ध्यान, अब सब्र का बांध टूटा

कोरोना महामारी में दिवंगत मनरेगा कर्मचारियों को दी श्रद्धांजलि, परिजन बोले- सरकार ने सामाजिक सुरक्षा का नहीं दिया ध्यान, अब सब्र का बांध टूटा रायपुर। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने आज बूढ़ापारा तालाब स्थित धरना स्थल में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। यहां सभा स्थल में महासंघ ने कोरोना महामारी के दौरान दिवंगत मनरेगा कर्मचारियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर दिवंगत कर्मी के परिवार उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि उनके पति ने मनरेगा योजना में सालों से कार्यरत थे, लेकिन मृत्यु के बाद उन्हें अब तक प्रशासन ने एक रुपए भी नहीं दी है। हमारे पति तो चले गए लेकिन सरकार को मनरेगा में कार्य करने वाले कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का ध्यान देना चाहिए। महासंघ के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी सूरज सिंह ठाकुर ने बताया कि समस्त मनरेगा कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूट गया है। हम आपको अवगत कराना चाहते है कि हमें अक्टूबर से अप्रैल तक लगातार 6 माह तक बिना वेतन के कार्य किया है, और वित्तीय वर्ष 2021-22 का लक्ष्य प्राप्त किया है। साथ ही अपनी मांगों के संबंध में कई बार पत्राचार किया गया है। 14 मार्च को सांकेतिक एक दिवसीय धरना कार्यक्रम भी किया गया था, किंतु अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता। अब जब देख रहे है कि हम लोग हड़ताल में है तो मुख्यमंत्री के समक्ष हमारी छबि खराब करने में लगे है, और मांग पर विचार ना करते हुए हड़ताल का समय सही नहीं है करके उलझाने का प्रयास कर रहे है। संवेदनशील मुख्यमंत्री से निवेदन है कि एक बार हमारी परिस्थिति को समझने का प्रयास करे। सकारात्मक मध्यस्त्ता करते हुए हमारी मांगों को पूर्ण करने का कष्ट करें। बता दें कि कोरोना काल में भी हमने अपनी जान की परवाह किए बिना छत्तीसगढ़ को देश भर में अव्वल स्थान दिलाया है।

  • वित्तीय वर्ष 2019-20 में 13.61 मानव दिवस,
  • वित्तीय वर्ष 2020-21 में 18.86 करोड़ 
  • वित्तीय वर्ष 2021-22 में 16.92 करोड़ मानव दिवस सृजित किए है।
  • इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 3009 करोड़,
  • वित्तीय वर्ष 2020-21 में 4113 करोड़
  • वित्तीय वर्ष 2021-22 में 3988 करोड़ की राशि का व्यय किया गया है, जो प्रस्तावित लक्ष्य का शत प्रतिशत है।
  हमारी मेहनत और योजना के प्रति लगन का साक्ष्य है, किंतु इतना करने के बाद भी अधिकारियों का रवैया हमारे लिए संवेदनशील नहीं है, जो कि खेद का विषय है।