आधार कार्ड पर सरकार की बड़ी चेतावनी, लेकिन कुछ देर बाद लेना पड़ा वापस, जानिए असली वजह

आधार कार्ड पर सरकार की बड़ी चेतावनी, लेकिन कुछ देर बाद लेना पड़ा वापस, जानिए असली वजह नई दिल्ली। सरकार ने आधार कार्ड को लेकर एक चेतावनी जारी की थी। लेकिन कुछ देर बात ही उसे वापस ले लिया है। पहले नागरिकों को आधार के मिस यूज से बचने के लिए किसी भी संस्थान या कंपनी के साथ आधार कार्ड डिटेल शेयर करने की चेतावनी दी गई थी। अब सरकार द्वारा एक नई प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है।  नई प्रेस विज्ञप्ति में सरकार ने इसे वापस लेने की बात कही है। बयान वापस लेने के पीछे 'गलत अर्थ' की संभावना का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है, "प्रेस विज्ञप्ति की गलत व्याख्या की संभावना को देखते हुए, इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है।" मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रेस विज्ञप्ति में लोगों को सलाह दी गई थी कि वे किसी भी संगठन के साथ अपने आधार की प्रति साझा न करें क्योंकि इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। इसकी जगह पर आधार संख्या के सिर्फ अंतिम चार अंकों को दर्शाने वाले आधार (मास्क्ड आधार) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें आधार संख्या के पहले आठ अंक छिपे रहते हैं और सिर्फ अंतिम चार अंक ही दिखते हैं। लेकिन इस विज्ञप्ति की गलत व्याख्या की आशंका को देखते हुए इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है।’’ केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है  कि आधार धारकों को केवल इसे इस्तेमाल करने और साझा करने में सामान्य विवेक का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। यूआईडीएआई के बेंगलुरु स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति में आम जनता से किसी भी संगठन के साथ अपने आधार की फोटोकॉपी साझा नहीं करने को कहा गया था। इसमें विकल्प के तौर पर आधार संख्या के अंतिम चार अंकों को प्रदर्शित करने वाले आधार का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई थी। मंत्रालय ने बयान में कहा कि यूआईडीएआई की तरफ से जारी आधार कार्डधारकों को केवल अपने आधार नंबर के इस्तेमाल एवं उसे दूसरे के साथ साझा करने में सहज विवेक का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। बयान में कहा गया कि आधार पहचान के सत्यापन की व्यवस्था ने आधार धारक की पहचान और गोपनीयता की रक्षा और सुरक्षा के लिए पर्याप्त बंदोबस्त किए हैं।

गलत हाथों में आधार जाने से धोखाधड़ी की आशंका

सरकार जानती है कि आधार नम्बर का दुरुपयोग बैंक अकाउंट हैक करने, ग़लत गतिविधियों के लिए दूसरे के नाम से फ़ोन सिम लेने, ज़मीन घोटाले, दूसरे के नाम से लोन लेने, बीमा क्लेम में बाधा होने जैसे कामों में हो सकता है। यदि आप ही सोचते हैं कि आप कुछ ग़लत नहीं करते और इसलिए आपको निजता की फ़िक्र नहीं है, तो आप ग़लत हैं। आधार नम्बर ग़लत हाथों में जाने से आपके साथ कितने ही तरह के फ़्रॉड हो सकते हैं। सवाल ये है कि जानकार लोग इन निजता के हनन से होने वाले इन ख़तरों के बारे में सालों से कह रहे हैं। फिर सरकार को ये बात समझ क्यों नहीं आयी? क्यों सबको आधार नम्बर देने के लिए प्रेरित या मजबूर किया गया था? सुप्रीम कोर्ट ने निजता को जब मौलिक आधार घोषित किया था, तो सरकार से data privacy law बनाने के लिए भी कहा था। Data Privacy Bill 2019 से लम्बित है, मोदी सरकार को जैसे कोई जल्दी ही नहीं है। इस क़ानून के न बनने से आपका डेटा चुराने वालों पर सरकार का कोई ख़ास कंट्रोल नहीं है। निजता के हनन से आपके बैंक अकाउंट, ज़मीन के रिकार्ड, आपके नाम से फ़र्ज़ी फ़ोन कनेक्शन और उनका अपराध में इस्तेमाल वग़ैरा भी हो सकता है। इसलिए निजता ज़रूरी है।