छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री किसान का बेटा ‘भूपेश’ बने रहेंगे या राजा ‘सिंहदेव’ बनेगा, आज ये लेंगे फैसला...
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सियासी पारा पिछले कुछ दिनों से चढ़ा हुआ है। ढाई-ढाई साल सत्ता हंस्तातरण को लेकर बवाल मचा हुआ है, लेकिन कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। सब इशारों-इशारों में बात कह रहे हैं। इतना तो तय की कुर्सी की लड़ाई इस बार आर-पार की हो रही है। कोई हार मानने को तैयार नहीं है, ना भूपेश बघेल और ना ही टीएस सिंहदेव। लेकिन राजा और किसान में से कौन मुख्यमंत्री होगा, इसका फैसला आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी करेंगी।
भूपेश को दूसरी बार दिल्ली बुलावा
इधर, कांग्रेस हाईकमान ने एक फिर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दिल्ली बुलाया है। मुख्यमंत्री शुक्रवार सुबह दिल्ली रवाना होंगे। लेकिन उन्हें किस लिए वापिस दिल्ली बुलाया गया है, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। कयास लगाए जा रहे है कि ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले का अंत नहीं हुआ है। समझौते को लेकर पेंच फंसा या कोई बनाने को तैयार नहीं है, इसका खुलासा नहीं किया गया है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव दिल्ली में ही मौजूद है।
इससे पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बुधवार को दिल्ली से लौटे थे. इस दौरान रायपुर एयरपोर्ट पर उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी जब कहेंगे इस्तीफा दे दूंगा। प्रदेश के लोगों ने किसान के बेटे को सत्ता सौंपी है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि हर खिलाड़ी कप्तान बनना चाहता है। वे अभी दिल्ली में ही डटे हुए हैं।
कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंचे
कांग्रेस विधायकों का दिल्ली से बुलावा आया है। जिसके बाद से दिल्ली में कांग्रेस विधायकों का जमावड़ा शुरू हो गया है। अभी करीब दर्जन भर विधायक दिल्ली रवाना हो चुके हैं। 27 अगस्त को दिल्ली में क़रीब 50 विधायकों के जुटने की चर्चा है।
सूचना के मुताबिक विशेष उड़ान से बृहस्पत सिंह, देवेंद्र यादव, कुलदीप जुनेजा, शिशुपाल शोरी, विनोद सेवनलाल चंद्राकर, विनय भगत, प्रकाश नायक, किश्मत लाल नंद, द्वारिकाधीश यादव, चंद्रदेव राय, यूडी मिंज, विनय जायसवाल, गुलाब कमरो, गुरुदयाल बंजारे, पुरुषोत्तम कंवर, कुंवर निषाद, चिंतामणि महाराज, भुनेश्वर बघेल, लक्ष्मी धुर्वे, रश्मि सिंह और शकुन्तला साहू दिल्ली रवाना हुए हैं। मंत्री अमरजीत भगत भी दिल्ली गए हैं।
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कांग्रेस विधायक दिल्ली रवाना[/caption]
रवाना होने से पहले विधायक देवेन्द्र यादव ने कहा कि आलाकमान से मुलाक़ात करने दिल्ली जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मुद्दों पर चर्चा मज़बूती से करेंगे। सिर्फ़ मैं ही नहीं, बल्कि सभी विधायक जा रहे हैं। जैसे अब तक हम जनता की सेवा करते आ रहे हैं। आगे भी सीएम भूपेश बघेल के नेतृत्व में सेवा करते रहेंगे।
दिल्ली में इन प्रमुख नेताओं का जमावड़ा, बघेल और सिंहदेव के लिए लॉबिंग
इस बीच दिल्ली में छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू 18 अगस्त से ही दिल्ली में जमे हुए हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। संसदीय सचिव विकास उपाध्याय भी गुरुवार को दिल्ली पहुंच गए हैं। राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम भी दिल्ली पहुंच रही हैं। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत 28 अगस्त को दिल्ली जाने की सूचना हैं। सभी नेता दिल्ली जाने की अलग-अलग वजह बता रहे हैं।
35 से ज्यादा विधायक पहुंचे पुनिया के घर
ताजा जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात तक छत्तीसगढ़ के 35 से ज्यादा विधायकों ने दिल्ली कूच किया है। सभी विधायक छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया के यहां पहुंचे हैं। इससे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
इससे पहले पीएल पुनिया ने ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि छत्तीसगढ़ के विधायकों को दिल्ली नहीं बुलाया गया है। ये सब जानकारियां पूरी तरह से भ्रामक है। इसी बीच सभी कांग्रेस विधायक पीएल पुनिया के यहां पहुंचे हैं। इससे प्रदेश की राजनीति में हलचल दिखाई देने लगी है।
50 से ज्यादा विधायक पहुंचेंगे दिल्ली
बताया जा रहा है कि शुक्रवार दोपहर तक 50 से ज्यादा कांग्रेसी विधायक दिल्ली पहुंच जाएंगे। विधायकों का यह जमावड़ा दरअसल मुख्यमंत्री के पक्ष में एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
बता दें कि दिल्ली में हुई बैठक के बाद रायपुर लौटकर आए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने बयान में कहा था कि, ढाई साल का राग अलापने वाले सफल नहीं होंगे। प्रदेश प्रभारी पुनिया ने भी अपने बयान में स्पष्ट कर दिया था। सीएम ने कहा था कि सोनिया-राहुल ने मुझ जैसे किसान को सरकार की जिम्मेदारी सौंपी है। बघेल ने जब यह बयान दिया था, तब यह माना जा रहा था कि कथित ढाई-ढाई साल का फॉर्मूले जैसी कोई बात नहीं है, लेकिन मंत्री टीएस सिंहदेव के दिल्ली में दिये गए बयान ने मुद्दे को हवा दे दी, जिसमें उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी कैप्टन बनना चाहता है। इधर प्रदेश में कांग्रेस विधायकों की लगातार बैठक होती रही।
दिग्विजय सिंह की अहम भूमिका
जानकारी के मुताबिक, इस विवाद के समाधान में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की भी बड़ी भूमिका हो सकती है। शीर्ष नेतृत्व उनसे इस संबंध में सलाह-मशवरा कर रहा है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेतृत्व की मौजूदा पीढ़ी में अधिकतर लोग दिग्विजय सिंह के करीबी हैं। उनको प्रदेश की राजनीतिक समझ भी अधिक है। उनसे मिलकर समाधान की ओर ले जाने की कोशिश हो रही है।
वर्तमान मुख्यमंत्री को हटाकर क्या पार्टी खतरा मोल लेंगी
देश में कांग्रेस की स्थिति ठीक नहीं है। कमोबेश सभी राज्यों में उसकी हालत खराब है। छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान में पार्टी की सरकार है। लेकिन सभी जगह अंदरूनी कलह चरम पर है। पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर और सिद्धू के बीच शीत युद्ध चल रहा है। राजस्थान में अभी मामला शांत है, लेकिन सचिन पायलट ने अपना रूख स्पष्ट कर दिया है। अगर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को हटाते है तो राजस्थान में अशोक गहलोत को भी हटाना होगा। इसके बाद पायलट को मुख्यमंत्री बनाना होगा। वहीं पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनाव होना है। पार्टी को फंड की जरूरत होगी। छत्तीसगढ़ पहले भी तीन राज्यों के चुनाव में फंड की व्यवस्था कर चुका है! अब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को फंड की जरूरत होगी। वो छत्तीसगढ़ ही पूरा कर सकता है। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान क्या खतरा मोल लेना चाहेगी ये तो देखनी वाली बात है।
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कांग्रेस में मेहनत करने वालों को पद नहीं
कांग्रेस में कहा जाता है कि मेहनत करने वालों को पद नहीं मिलती। मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संघर्ष करके पार्टी को राज्य में सत्ता दिलाई। लेकिन अंत में हाईकमान ने सत्ता कमलनाथ को सौंप दी। इसके बाद सिंधिया को राज्य की राजनीति से दूर रखने की कोशिश की गई। जिसके चलते लोकसभा में उनकी हार हो गई। इसी तरह सचिन पायलट ने राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान अशोक गहलोत केंद्र की राजनीति में व्यस्त थे। लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत को बना दिया गया।
छत्तीसगढ़ में भी ऐसा ही होने वाला था। लेकिन भूपेश बघेल के चलते हो नहीं पाया। उन्होंने उसी दौरान आलाकमान को वास्तविक स्थिति से अवगत करा दिया। जिसके चलते उन्हें अपना फैसला बदलना पड़ा। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि भूपेश बघेल ने मरी हुई कांग्रेस को राज्य में फिर से खड़ा किया। उसमें नई जान डाली। सोई हुई पार्टी को जगाया और पार्टी को आंदोलन करना सिखाया। संगठन को मजबूत बनाया। जिसके चलते राज्य में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना। और भाजपा सरकार के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश उपजा। जिसकी बदौलत कांग्रेस की एकतरफा जीत हुई। वहीं टीएस सिंहदेव ने घोषणा पत्र बनाने में भूमिक निभाई।
सर्किट हाउस में जुटे थे विधायक
दिल्ली रवाना होने से इससे पहले रायपुर स्थित सर्किट हाउस में 10 से ज्यादा कांग्रेस विधायकों की बैठक हुई थी. इसी लेकर कई कयास लगाए जा रहे थे. इस बैठक में विधायक बृहस्पत सिंह, चंद्रदेव राय, यूडी मिंज, विनय जायसवाल, गुलाब कमरो, गुरुदयाल बंजारे, पुरषोत्तम कंवर, कुंवर निषाद, चिंतामणि महाराज, भुनेश्वर बघेल, रश्मि सिंह समेत अन्य विधायक शामिल थे.
बता दें कि 24 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की करीब 3 घंटे तक बैठक हुई थी. बैठक में कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया भी शामिल थे. बैठक खत्म होने के बाद प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने मीडिया से बातचीत की थी. जहां उन्होंने कहा था कि किसी तरह की राजनीतिक चर्चा नहीं हुई है.
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