मोदी सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला, तिल,मूंग समेत 17 फसलों का बढ़ा समर्थन मूल्य

मोदी सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला, तिल,मूंग समेत 17 फसलों का बढ़ा समर्थन मूल्य नई दिल्ली। मोदी सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट और सीसीईए (CCEA) की अहम बैठक के बाद सरकार ने 17 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को बढ़ा दिया है। कैबिनेट ने बुधवार को यह फैसला लिया। तिल पर 523 रुपये की वृद्धि की गई है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया कि पिछले 8 वर्षों में बीज के बाजार के दृष्टिकोण के कारण फ़ायदा हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। अनुराग ठाकुर ने बताया कि इस बार खरीफ की सभी 14 फसलों और उनकी वैरायटीज सहित 17 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है। पिछले साल जो तय किया गया कि लागत प्लस 50 प्रतिशत, उसे हमने लगातार आगे बढ़ाया है। किसान सम्मान निधि के तहत 2 लाख करोड़ खाते में जा चुका है। फर्टिलाइजर पर 2 लाख 10 हज़ार करोड़ की सब्सिडी दी गई है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि आज कैबिनेट की बैठक में फ़ैसला लिया गया है कि तिल के दाम में 523 रुपए की बढ़ोतरी होगी। मूंग पर प्रति क्विंटल 480 रुपए की बढ़ोतरी होगी। सूरजमुखी पर 358 रुपए प्रति क्विंटल है। मूंगफली पर 300 रुपए की बढ़ोतरी होगी। उन्होंने आगे कहा कि कृषि बजट भी बढ़कर 1 लाख 26 हजार करोड़ रुपए का हो गया है। हमारी सरकार ने बाकी कई फसलों को भी एमएसपी के दायरे में लेकर आई है। बीमा से सिंचाई तक हर कदम पर सशक्तीकरण हुआ है। कृषि क्षेत्र में कई कदम उठाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फसल विविधिकरण को प्रोत्साहन देते हुए सरकार ने एमएसपी की दरों में ऐतिहासिक वृद्धि की थी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई और उससे उनकी बिक्री भी बहुत हुई। पिछले आठ सालों में मोदी सरकार के फैसलों से किसानों की आय बढ़ी है। साथ ही, किसानों को राहत भी मिली है। केंद्र सरकार की फैसले के बाद साल 2022-23 के लिए खरीफ की फसलों जैसे धान, सोयाबीन, मक्का आदि फसलों का MSP बढ़ जाएगा और किसानों को अपनी फसल की ज्यादा कीमत मिलेगी। माना जा रहा है कि सरकार खरीफ फसलों की एमएसपी में 5 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती है। बता दें कि फिलहाल 2021-22 के लिए धान का एमएसपी 1940 रुपए प्रति क्विंटल है।

एमएसपी क्या है

एमएसपी वह न्यूनतम समर्थन मूल्य है जो किसानों को उनकी फसल पर मिलता है। फसलों की कीमतों में बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर किसानों पर नहीं पड़ता यानी भले ही बाजार में उस फसल की कीमतें कम हो, लेकिन किसानों की एमएसपी त होती है। सरकार हर फसल सीजन से पहले सीएसीपी यानी कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस की सिफारिश पर एमएसपी तय करती है। खरीफ के अंतर्गत धान (चावल), मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंग, मूंगफली, गन्ना, सोयाबीन, उडद, तुअर, कुल्थी, जूट, सन, कपास आदि। खरीफ की फसलें जून जुलाई में बोई जाती हैं। सितंबर-अक्टूबर में इनकी कटाई होती है।  बीजेपी और सिंहदेव के बयान से सरकार मुश्किल में, सीएम भूपेश बोले- गोली नहीं चलेगी, भाजपा दिल्ली में करें विरोध केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का ऐलान, किसानों के लिए जल्द आएगा इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर PM Modi’s success proves democracies can deliver: Biden praises India’s Covid war