जवानों की मेहनत लाई रंग : बोरवेल से राहुल साहू को सुरक्षित निकाला, ग्रीन कारिडोर से अस्पताल किया रवाना
जवानों की मेहनत लाई रंग : बोरवेल से राहुल साहू को सुरक्षित निकाला, ग्रीन कारिडोर से अस्पताल किया रवाना
जांजगीर-चांपा। मालखरौदा के पिहरीद में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मेहनत रंग लाई है। बोरवेल में फंसे राहुल साहू को 105 घंटे बाद सुरक्षित निकाल लिया गया है। उसे अस्पताल ले जाया गया। जल्दी हास्पिटल पहुंचाने के लिए ग्रीन कारिडोर बनाया गया। वही मौके पर भारी भीड़ जुटी हुई थी। ग्रामीण राहुल को देखने दिनभर डटे हुए थे।
ग्रीन कारिडोर के लिए बिलासपुर और जांजगीर पुलिस की टीम द्वारा कार्डिनेट किया गया है। ऑक्सीजन और सर्वसुविधायुक्त एंबलेंस से अपोल ले जाया गया। एंबुलेंस में सिविल सर्जन और दो स्पेशलिस्ट डॉक्टरी टाम मौजूद है। खुद कलेक्टर एंबुलेंस को लेकर बिलासपुर अपोलो जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि माना कि चुनौती बड़ी थी, हमारी टीम भी कहाँ शांत खड़ी थी, रास्ते अगर चट्टानी थे, तो इरादे हमारे फौलादी थे, सभी की दुआओं और रेस्क्यू टीम के अथक, समर्पित प्रयासों से राहुल साहू को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है। वह जल्द से जल्द पूर्ण रूप से स्वस्थ हो, ऐसी हमारी कामना है।
https://twitter.com/bhupeshbaghel/status/1536777266197168128?t=9udYa4iz_P2WF2lXKYeOWw&s=08
खेलते समय बोरवेल में गिरा था राहुल
ग्राम पिहरीद में 11 वर्षीय बालक राहुल साहू अपने घर के पास खुले बोरवेल में गिरकर फंस गया था। 10 जून को दोपहर लगभग 2 बजे अचानक घटी इस घटना की खबर मिलते ही जिला प्रशासन की टीम कलेक्टर के नेतृत्व में तैनात हो गई। समय रहते ही ऑक्सीजन की व्यवस्था कर बच्चे तक पहुंचाई गई। कैमरा लगाकर बच्चे की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ उनके परिजनों के माध्यम से बोरवेल में फसे राहुल पर नजर रखने के साथ उनका मनोबल बढाया जा रहा था। उसे जूस, केला और अन्य खाद्य सामग्रियां भी दी जा रही थी। विशेष कैमरे से पल-पल की निगरानी रखने के साथ ऑक्सीजन की सप्लाई भी की जा रही थी।
https://twitter.com/GovernorCG/status/1536789644984975360
10 जून से ही जारी था रेस्क्यू कार्य
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन (एनडीआरएफ) की टीम ओडिशा के कटक और भिलाई से आकर रेस्क्यू में जुटी थी. सेना के कर्नल चिन्मय पारीकअपने टीम के साथ इस मिशन में जुटे थे। रेस्क्यू से बच्चे को सकुशल निकालने के लिए हर संभव कोशिश की गई। देश के सबसे बड़े रेस्क्यू के पहले दिन 10 जून की रात में ही राहुल को मैनुअल क्रेन के माध्यम से रस्सी से बाहर लाने की कोशिश की गई। राहुल द्वारा रस्सी को पकड़ने जैसी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिए जाने के बाद परिजनों की सहमति और एनडीआरएफ के निर्णय के बाद तय किया गया कि बोरवेल के किनारे तक खुदाई कर रेस्क्यू किया जाए। रात लगभग 12 बजे से पुनः अलग-अलग मशीनों से खुदाई प्रारंभ की गई।
लगभग 60 फीट की खुदाई किए जाने के बाद पहले रास्ता तैयार किया गया। एनडीआरएफ और सेना के साथ जिला प्रशासन की टीम ने ड्रीलिंग करके बोरवेल तक पहुचने सुरंग बनाया। सुरंग बनाने के दौरान कई बार मजबूत चट्टान आने से इस अभियान में बाधा आई। बिलासपुर से अधिक क्षमता वाली ड्रिलिंग मशीन मंगाए जाने के बाद बहुत ही एहतियात बरतते हुए काफी मशक्कत के साथ राहुल तक पहुंचा गया।