'अग्निपथ' योजना पर बवाल : तीनों सेनाओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस, युवाओं के सवालों के दिये जवाब नई दिल्ली। 'अग्निपथ' योजना को लेकर देशभर में बवाल छिड़ गया है। इस बीच रविवार को जल, थल और वायु सेना के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्रेस कांफ्रेंस की। लेफ्टिनेंट जनरल अरुण पुरी ने कहा कि (अग्निपथ) योजना को वापस नहीं लिया जाएगा। इसे वापस क्यों लिया जाए, यह एक प्रगतिशील कदम है। लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी बोले ि हमारे साथ जो अग्निवीर में जुड़ना चाहता है वो प्रतिज्ञा लेगा कि उसने किसी प्रदर्शन या तोड़फोड़ में हिस्सा नहीं लिया...फौज में पुलिस वेरिफिकेशन के बिना कोई नहीं आ सकता। इसलिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों से अनुरोध है कि अपना समय खराब न करें: 'अग्निवर' को सियाचिन और अन्य क्षेत्रों जैसे क्षेत्रों में वही भत्ता और सुविधाएं मिलेंगी जो वर्तमान में नियमित सैनिकों पर लागू होती है। सेवा शर्तों में उनके साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। सैन्य मामलों के विभाग अतिरिक्त सचिव पुरी ने बताया कि देश की सेवा में बलिदान देने वाले अग्निवीरों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा। हर साल लगभग 17,600 लोग तीनों सेवाओं से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले रहे हैं। किसी ने कभी उनसे यह पूछने की कोशिश नहीं की कि वे सेवानिवृत्ति के बाद क्या करेंगे। नौसेना के वाइस एडमिरल डी.के त्रिपाठी ने बताया कि हमने अपनी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। 25 जून तक हमारा एडवरटाइजमेंट सूचना और प्रसारण मंत्रालय में पहुंच जाएगा। एक महीने के अंदर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 21 नवंबर को हमारे पहले अग्निवीर हमारे ट्रेनिंग संस्थान में रिपोर्ट करेंगे। नौसेना के वाइस एडमिरल डी.के. त्रिपाठी ने कहा कि नौसेना में हम महिला अग्निवीर भी ले रहे हैं। उसके लिए हमारी ट्रेनिंग में जो संशोधन करना है उसके लिए काम शुरू हो चुका है। हमें 21 नवंबर का इंतजार है, मुझे आशा है कि महिला और पुरुष अग्निवीर आईएनएस चिल्का पर रिपोर्ट करेंगे। एयर मार्शल एसके झा ने कहा भारतीय वायुसेना में 24 जून से अग्निवीरों के पहले बैच को लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह एक ऑनलाइन सिस्टम है। उसी के तहत उसपर रजिस्ट्रेशन शुरू होगा। एक महीने बाद 24 जुलाई से फैज-1 ऑनलाइन परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। सेना की तरफ से कहा गया कि 11.7 लाख के साथ अग्निवीर जो चाहे वह कर सकते हैं। उनके लिए ब्रिजिंग कोर्स के प्रावधान पर विचार किया जा रहा है। इस पर भी तैयारी चल रही है। इसे कौन करवाएगा। इसकी फीस कौन भरेगा? उन्होंने कहा कि सरकार ने कहा है कि अग्निवीरों को सीएपीएफ में प्राथमिकता दी जाएगी। सीएपीएफ में आरक्षण देने का प्लान पहले से था, क्योंकि सरकार को पता था कि ये जो 75 फीसदी अग्निवीर 4 साल बाद निकलेंगे। ये देश की ताकत होंगे। राज्य की सरकारों ने स्पष्ट कहा है कि पुलिस में अग्निवीरों को प्राथमिकता दी जाएगी। चार राज्य तो ऐसे हैं, जिन्होंने स्पष्ट कहा है कि सभी अग्निवीरों को जॉब देंगे। इसके अलावा बैंक अग्निवीरों को क्रेडिट देंगे। साझा प्रेस कांफ्रेंस में सैन्य अधिकारी ने कहा कि 21 साल के अंदर किस युवा की जॉब लगती है? लेकिन अग्निपथ स्कीम में भर्ती होने वाले 60 से 70 फीसदी युवा 10वीं पास होंगे। उन्हें 12 पास का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। आज की तुलना में अग्निवीरों को ज्यादा अलाउंस दिए जा रहे हैं। सेना ने आगे कहा कि सबसे बड़ी बात है कि अग्निपथ स्कीम में आने वाला युवा डिसिप्लिन होगा। किसी भी फील्ड में काम करने के सबसे पहले डिमांड यही होती है। प्रेस कांफ्रेंस में कहा गया कि यह रिफॉर्म काफी समय से लंबित था। 1989 में रिफॉर्म्स पर काम शुरू हुआ था। इसके लिए बाहर के देशों की स्टडी की। सभी देशों के अंदर उम्र देखी गई। उन्होंने कहा कि आज का युवा पहले से ज्यादा बेहतर है। इसका मतलब ये नहीं है कि पहले वाले खराब थे। लेकिन आने वाले युवा और बेहतर होंगे।