आत्मानंद स्कूल vs सरकारी स्कूल: स्कूल की छत पर छप्पर नहीं, मरम्मत के लिए जारी 3 करोड़ कहा गया ?

आत्मानंद स्कूल vs सरकारी स्कूल: स्कूल की छत पर छप्पर नहीं, मरम्मत के लिए जारी 3 करोड़ कहा गया ? कोंडागांव। कोरोना काल के दो साल बाद स्कूल खुल गए हैं, यहां बच्चे पढ़ने पहुंच भी रहे हैं, लेकिन शाला भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को परेशानी हो रही है। छत में छप्पर नहीं होने के कारण बारिश में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। वहीं सरकार ने आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलकर वाहवाही लूटी जा रही है। सरकार का ध्यान सिर्फ आत्मानंद स्कूल पर है, लेकिन सरकारी स्कूल की तरफ नहीं है। कोंडागांव में जर्जर प्राथमिक स्कूल की जो तस्वीर सामने आई है, वो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित है और इसकी मरम्मत के लिए केवल 15 हजार रुपये की आवश्यकता है। लेकिन प्रशासन इतना काम करने में भी नाकम रहा है। स्कूल की टपकती छत और वहां पर व्याप्त अव्यवस्था शासन की पोल खोलने के लिए काफी है, क्योंकि स्कूलों की मरम्मत के लिए 3 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके बावजूद इस राशि का उपयोग नहीं हुआ। ये जिला मुख्यालय का हाल है, तो गांवों का क्या होगा इससे आप खुद समझ सकते हैं। स्कूल की छत अब भी टपक रही है, बच्चे अब भी व्यवस्थाओं के अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर मरम्मत कार्य के लिए जारी की गई रकम गई कहां? स्कूल के प्रधान पाठक योगेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि लगातार हमारे द्वारा शिकायत करने के बाद भी स्कूल की ये हालतद देखने को मिल रहा है। शिकायत के बाद भी आज तक कोई अधिकारी नहीं आया। बच्चे और शिक्षक डर-डर कर यहां पढ़ते और पढ़ाते हैं।

अव्यवस्था क्यों, डीईओ नहीं बता पाया

डीईओ अशोक पटेल ने बताया कि जिले में ऐसे 301 स्कूल हैं, जहां मरम्मत की जरुरत है। इसके लिए 3 करोड़ की राशि जारी की गई थी। स्कूलों की स्थिति को लेकर अधिकारी ने कहा कि एक हफ्ते के भीतर हम स्कूलों में जरुरी व्यवस्था करा लेंगे। निकम्मा शिक्षक: शिक्षा सचिव के बयान से शिक्षकों में नाराजगी, कहा- निकम्मे शिक्षक करते हैं 80 काम, जानिए वो काम छत्तीसगढ़ में कोरोना केस में आई तेजी, मिले 161 नए मरीज, जानिए अपने जिले का हाल PM Modi’s success proves democracies can deliver: Biden praises India’s Covid war