शिक्षा व्यवस्था बेहाल, शिक्षा विभाग ने सभी डीईओ को दिए निर्देश, अब ये 4 गतिविधियां स्कूलों में होंगे लागू
शिक्षा व्यवस्था बेहाल, शिक्षा विभाग ने सभी डीईओ को दिए निर्देश, अब ये 4 गतिविधियां स्कूलों में होंगे लागू
रायपुर। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुधारने स्कूल शिक्षा विभाग प्रयासरत है। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग ने सभी डीईओ को निर्देश जारी किये हैं, जिसमें नई गतिविधियों को स्कूल में संचालित करने कहा गया है। शिक्षा विभाग नें चार अलग-अलग बिंदुओं में शिक्षा सुधार के निर्देश दिये हैं, जिसे सभी स्कूलों में लागू किया जाना है। शिक्षा सचिव की तरफ से सभी जिला शिक्षा अधिकारी को इस बारे में निर्देश दिया गया है।
पिछले महीने 16 और 17 जून को हिमाचल प्रदेश में सभी राज्यों के मुख्य सचिव की बैठक हुई थी। बैठक में स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता की सुधार को लेकर चर्चा हुई थी, उसी दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कुछ कदम को लागू करने का फैसला लिया गया था। अब उन्ही व्यवस्थाओं को स्कूलों में लागू करने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा सचिव ने सभी जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया है कि स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए जिले के सभी स्कूलों में कुछ गतिविधियां संचालित की जानी है। इसका क्रियान्वयन कर इसकी नियमित मानिटरिंग विभाग को उपलब्ध करायें।
1. पालक जागरूकता अभियान (Parents awareness drive)
अभियान का उद्देश्यः
• सभी शालाओं में शाला प्रबन्धन समिति एवं पालकों का सम्मेलन आयोजित करवाना
पालकों को अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने हेतु प्रोत्साहित करना पालकों को नियमित स्कूल आने हेतु प्रेरित करते हुए उन्हें पूर्ण महत्व प्रदान करना
पालकों को स्कूलों से जोड़ने एवं बच्चों की पढ़ाई में ध्यान देने के नवीन तरीके ढूंढना प्रत्येक शाला में सक्रिय पालक ढूंढकर उन्हें अन्य पालकों को सक्रिय करने की जिम्मेदारी देना
क्रियान्वयन हेतु कोर ग्रुप का गठन:
प्रत्येक जिले एवं विकासखंड से पांच पांच विभागीय अधिकारियों का कोर ग्रुप में चयन जिले स्तर से एपीसी, डाईट अकादमिक सदस्य, एसएमसी मास्टर ट्रेनर एवं विकासखंड स्तर से सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी
संकुल स्तर में प्रत्येक शाला से एक सक्रिय शाला प्रबंध समिति के सदस्य, एक शिक्षक, एक सक्रिय माता, चयनित जनप्रतिनिधि एवं एक प्रभावी व्यक्तित्व जिनकी बात सभी मानते हों
कोर ग्रुप के कार्य:
जिले के समस्त शालाओं में पालक जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु कार्ययोजना बनाना
प्रत्येक शाला में पालक जागरूकता हेतु रणनीति एवं चर्चा के बिंदु /गतिविधि तैयार करना विकासखंड एवं संकुल स्तर पर कोर ग्रुप का उन्मुखीकरण एवं स्थानीय इनपुट देना
• शाला स्तर पर शाला प्रबन्धन समिति एवं पालकों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम
पालक उन्मुखीकरण उपरान्त निरंतर फोलो अप एवं पालकों की सक्रिय सहभागिता के बेहतर उदाहरणों का संकलन, दस्तावेजीकरण एवं मीडिया को उपलब्ध करवाया जाना
पालकों के उन्मुखीकरण हेतु चर्चा/ गतिविधि के क्षेत्रों का निर्धारण:
• बच्चों एवं शिक्षकों की शाला में नियमित उपस्थिति एवं बेहतर शिक्षा सुविधा सुलभ करवाना
CWSN एवं शाला से बाहर के बच्चों को शाला में दाखिला एवं उनके लिए आवश्यक सुविधाएँ
● पालकों को स्कूल से जोड़ने एवं उन्हें बच्चों की पढाई पर ध्यान देने हेतु रणनीतियां
घर पर बच्चों के सीखने हेतु बेहतर माहौल बनाना एवं पढने हेतु उचित स्थान देना
• बच्चों के घर की भाषा एवं स्कूल की भाषा अलग होने पर होने वाली परेशानियां एवं शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को सीखने हेतु स्थानीय सामग्री के उपयोग हेतु आवश्यक समर्थन
● आंगनवाडी में सभी बच्चों का प्रवेश एवं उनमें बच्चों के सीखने हेतु आवश्यक सहयोग शाला में बच्चों को मिलने वाली समस्त सुविधाओं की समय पर उपलब्धता एवं गुणवत्ता हेतु संपर्क
सफलतापूर्वक ट्विनिंग हेतु आवश्यक विशेषताएं
• दोनों साझेदारों के बीच win-win स्थिति होनी चाहिए
• दोनों साझेदार ट्विनिंग के क्षेत्र के लिए सहमत एवं एकमत होना चाहिए • दोनों की आवश्यकताओं एवं वास्तविक मांग पर आधारित होनी चाहिए
• स्पष्ट एवं फोकस दृष्टि होनी चाहिए एवं इस बाबत ठोस योजना होनी चाहिए
. नेतृत्व क्षमता एवं कौशल होना चाहिए एवं आवश्यक संसाधन हेतु पर्याप्त बजट सुलभ होना चाहिए • एक दूसरे का सम्मान, कल्चर की समझ एवं सतत संवाद या कम्युनिकेशन होना चाहिए
सफल ट्विनिंग हेतु सुझावात्मक क्षेत्र:
• एक दूसरे की शालाओं का शैक्षिक भ्रमण एवं कक्षाओं, शिक्षण पद्धतियों, सुविधाओं से परिचय • एक दूसरे की संस्कृति, परंपराओं एवं पृष्ठभूमि से परिचय एवं समझ विकसित करना
• किसी परियोजना में शामिल होकर मिलकर उसे पूरा करने की दिशा में कार्य करना
• विषय विशेषज्ञ शिक्षक से अन्य शिक्षकों एवं बच्चों को मार्गदर्शन या अन्य शालाओं को
बेहतर प्रयासों / अभ्यासों को देखकर सीखने के अवसर मुहैय्या कराते हुए सीखना
मेंटरिंग
बच्चों के लिए समर कैम्प के अलावा विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए मिलकर तैयारी करना शाला त्यागी बच्चों को पढाई में मदद करने दानोत्सव जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग देना जैसे बस्ता, कपडे एवं अन्य आवश्यक सामग्री एकत्रित कर उपलब्ध कराना
• मिलकर कुछ उत्पाद बनाकर बेचकर उससे हुई आय से गरीब बच्चों को सहयोग जैसे किसी शाला के बच्चों द्वारा मिट्टी के दिए बनाकर उसे बेचकर वृद्धाश्रम के लिए वाटर कूलर दान में दिया
• अख़बार के साथ आने वाले बाल पत्रिकाओं को एकत्र कर सरकारी स्कूलों के मुस्कान पुस्तकालयों के लिए दान करना
● किसी स्कूल में बढिया आधुनिक प्रयोगशाला होने की स्थिति में अन्य शालाओं के बच्चों को समय समय
पर उस प्रयोगशाला के उपयोग का अवसर उपलब्ध कराना
• किसी परियोजना जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम या किसी फिल्म को बनाने में एक दूसरे का सहयोग लेकर उस परियोजना को पूरा करना
ई-ट्विनिंग के अवसर ढूंढकर अन्य राज्यों एवं देशों के बच्चों के साथ भी साझेदारी के अवसर ई-ट्विनिंग हेतु इन्टरनेट, स्काइप या अन्य किसी सोशियल मीडिया का उपयोग करना
• सरकारी स्कूलों व्दारा स्थानीय लोक कलाकारों को निजी स्कूलों में बच्चों को लोक कला सिखाने हेतु
उपलब्ध कराने में सहयोग देना
3. निकटवर्ती स्कूलों द्वारा आंगनबाडी को अपनाना
कार्यक्रम का उद्देश्य:
● आंगनबाडी एवं प्राथमिक शालाओं के बीच नजदीकी संबंध स्थापित करवाना
• छोटे बच्चों को आंगनबाडी स्तर पर सीखने में सहयोग करने के दिशा में सहयोग समुदाय को इस बात के लिए जागरूक करना कि सभी बच्चों को नियमित आंगनबाडी भेजें
• आंगनबाडी में सीखने-सिखाने में स्मार्ट माता एवं स्थानीय स्तर पर सुविधाएं देना • छोटे बच्चों को निकट के बड़े स्कूलों में ले जाकर उन्हें आगे पढने हेतु प्रेरित करना
क्रियान्वयन हेतु कोर ग्रुप का गठन:
• प्रत्येक जिले एवं विकासखंड से पांच पांच विभागीय अधिकारियों का कोर ग्रुप में चयन
● जिले स्तर से महिला एवं बाल विकास के अधिकारी, DIET, एपीसी, एवं विकासखंड स्तर से शाला संकुल प्राचार्यों, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विकासखंड स्रोत समन्वयक एवं महिला एवं बाल विकास से संबंधित अधिकारियों को कोर ग्रुप में शामिल कर जवाबदेही देवें :
कोर ग्रुप के कार्य:
• कोर ग्रुप द्वारा प्राथमिक शाला एवं आंगनबाड़ी की जोड़ी बनाने हेतु मैपिंग की योजना बनाकर
तत्काल क्रियान्वयन हेतु दोनों विभागों की ओर से आवश्यक कार्यवाहियां की जाएगी • प्राथमिक शालाएं किस प्रकार से निकट के आंगनबाडी को अकादमिक समर्थन दे सकेंगी, इसके लिए
रणनीतियां बनाकर आवश्यक कार्यवाहियां की जानी होगी
• कोर ग्रुप को दस दिनों के भीतर अपने जिले की सभी प्राथमिक शालाओं एवं आंगनवाडी की आपस में ट्विर्निंग करने हेतु जवाबदेही देते हुए कार्यक्रम की निगरानी एवं प्रगति की समीक्षा करें।
क्रियान्वयन की रणनीतिः
कोर ग्रुप का उन्मुखीकरण कर उनके माध्यम से आंगनबाडी में छोटे बच्चों को सीखने के अवसर देने की आवश्यकता है, इस संबंध में सभी हितग्राहियों का उन्मुखीकरण आवश्यक है
प्राथमिक शालाओं एवं निकट के आंगनबाडी के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य प्रारंभ करना
• प्राथमिक शाला के शिक्षक द्वारा आंगनबाडी में सिखाने वाली टीम की मेंटरिंग करना निपुण भारत के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों को नोट कर आंगनबाडी को उसकी प्राप्ति के लिए आवश्यक
मार्गदर्शन एवं बच्चों के साथ उन लक्ष्यों में कार्य हो रहा है अथवा नहीं, इस पर ध्यान देना • कक्षा पहली में प्रवेश लेने वाले सभी बच्चों में कौन कौन सी दक्षताएं हासिल करवाई जानी है, उसकी संप्राप्ति सभी बच्चों में हासिल करने हेतु आवश्यक उपचारात्मक प्रयास
4. मांग-आधारित प्रशिक्षण का आयोजन
कार्यक्रम का उद्देश्य:
शिक्षकों के लिए उनकी आवश्यकता एवं मांग पर आधारित प्रशिक्षण की शुरुआत करना प्रशिक्षण की वजह से बच्चों की पढ़ाई के नुकसान को कम से कम करने की दिशा में कार्य
शिक्षकों के प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पहचान करने का कल्चर विकसित करना शिक्षकों द्वारा उनकी आवश्यकताओं पर आधारित प्रशिक्षण की मांग एवं उनकी सुलभता
• स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रशिक्षण मोड्यूल तैयार कर उनका उपयोग सुनिश्चित करना
क्रियान्वयन हेतु कोर ग्रुप का गठन:
प्रत्येक जिले एवं विकासखंड से पांच पांच विभागीय अधिकारियों का कोर ग्रुप में चयन • जिले स्तर से डाईट, एपीसी प्रशिक्षण, विभिन्न प्रशिक्षणों में मास्टर ट्रेनर्स की सफल भूमिका निभाते हुए स्रोत व्यक्ति, सेवानिवृत्त कुशल शिक्षक प्रशिक्षक एवं शिक्षाविद जो स्थानीय स्तर पर शिक्षा गुणवत्ता में सुधार हेतु इच्छुक हों कोर ग्रुप के कार्य:
• कोर ग्रुप द्वारा बालवाडी से लेकर सेकन्डरी स्तर तक शिक्षकों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा
शिक्षकों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं के आधार पर छोटे-छोटे कोर्सेस तैयार किये जाएंगे या प्रचलित
कोर्सेस को संकलित कर उन्हें शिक्षकों को करने हेतु उपलब्ध करवाया जाएगा विकासखंड स्तर पर मांग-आधारित प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सुविधाएँ एवं सिस्टम स्थापित किया जाएगा
क्रियान्वयन की रणनीतिः
• कोर ग्रुप का उन्मुखीकरण कर उनके माध्यम से छोटी छोटी विशेषज्ञ टीम बनाकर प्रशिक्षण मोड्यूल एवं डिजाइन तैयार किया जाना प्रारंभ किया जाएगा • विभिन्न विकासखंड एवं जिले आपस में समन्वय कर अपने अपने लिए अलग अलग प्रशिक्षण के क्षेत्रों
का निर्धारण कर लेवें ताकि वे आपस में एक दूसरे से साझा कर सकें शिक्षकों को अपनी रूचि एवं आवश्यकता के आधार पर प्रशिक्षण का चयन करने का अवसर देवें इस प्रकार के प्रशिक्षण के लिए शुरुआत में कुछ इस प्रकार के क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सकता है
1. सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र 2. स्थानीय भाषा में बच्चों को सिखाए जाने की आवश्यकता 3. सामाजिक अंकेक्षण कैसे करवाएं 4. शालाओं का सुरक्षा ओडिट कैसे करें 5. लर्निंग आउटकम के आधार पर सभी बच्चों का सीखना सुनिश्चित करना 6. विद्यार्थी विकास सूचकांक का बच्चों की प्रगति की ट्रेकिंग में उपयोग 7. बस्ताविहीन शालाओं का आयोजन कैसे करें 8. समग्र रिपोर्ट कार्ड में बच्चों की प्रगति का अंकन एवं उसके माध्यम से उपचारात्मक शिक्षण 9. असर टूल के सफल उपयोग हेतु गाँव के सभी बच्चों को शत-प्रतिशत दक्ष करना 10. बालवाडी हेतु गतिविधियाँ