आलेख: कोलंबस से रिश्ता क्या?- लक्ष्मण राज सिंह मरकाम
- रानी कमलापति के नाम देश का सबसे बड़ा रेलवेस्टेशन बना, वो चुप रहे…
2.15 नवम्बर को मान प्रधानमंत्री जी ने राष्ट्रीय छुट्टी घोषित की, उन्होंने विरोध किया..
- 550 से अधिक युवाओं को दस लाख के वाहन और 5927 गांवों में घर घर राशन पहुंचा, वो चुप रहे..
- तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रति परिवार 60,000/- के बोनस की व्यवस्था हुई, वे चुप रहे…
- शहरों में किराए से रहने वाले विद्यार्थियों की राशि 2500/- से बढ़कर 4000/- हो गई , तब भी चुप रहे ..
- पूरे मालवा नीमाड़ में मामा टंट्या के गौरव को स्थापित करते हुए, पातालपानी रेलवे स्टेशन व ISBT का नामकरण हुआ, वे चुप रहे ..
- छिन्दवाडा में राजा शंकर शाह ( RSS ) विश्विद्यालय से गौरव बढ़ा, वे चुप रहे..
- देश में पहली बार जनजातीय राष्ट्रपति का भव्य स्वागत भोपाल में हुआ, आमंत्रण बाद भी वे नहीं आए, समर्थन छोडिए, विरोध किया..
- वन राजस्व का 20 % सीधे ग्रामसभा को मिलने लगा वो चुप रहे..
- 827 वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तन किया, लाखों जनजातियों की भूमि को पहचान मिली.. वो चुप रहे..
लेकिन …
- मध्यप्रदेश को तोड़कर, खुद मलाई खाने वालों के लिए भिलीस्तान का विरोध किया, वो बिलबिला उठे…
- गोविंद गुरू महाराज के “ स्वदेशी “ के दिखाए मार्ग के अनुसार , “ विदेशी धर्म “ के “ विदेशी दिन “ 09 अगस्त का विरोध किया, तो जातिवादी, क्षेत्रवादी कीड़े बिलबिला उठे..
तो जो खुद नहीं जानते, वो करना क्या चाहते हैं, ऐसे दिग्भ्रमित लोगों की गीदड़भपकियों पर कौन ध्यान दे..
हम तो कहेंगे, 09 अगस्त तिथि ( ओल्ड ईसाई केलेंडर अनुसार ) कोलंबस का जन्म दिन है, कोलंबस ने नयी दुनिया में धर्म प्रचार के लिए रास्ते खोले.. कोलंबस को वेटिकन और स्पेन के राजा ने भेजा था..उसके ही जन्म को पूरे दुनिया पर थोपने के लिए, UN द्वारा घोषित किया, ताकि 09 अगस्त बनाते बनाते, 25 दिसंबर बनाने लगें.. अपने कई धार्मिक त्योहार भूल जाएं… यही तो षड्यंत्र है…
“ हाल ही हुआ है “ हाले हाले ले लू क्या “
यही तो नारा लगाएंगे आगे जाकर ..
“ जय भारत का नारा है, भारत देश सबसे न्यारा है “…
राम राम , जै गुरू गोविंद महाराज …
आलेख - लक्ष्मण राज सिंह मरकाम, लेखक व विचारक