भाटापारा। स्व रामदयाल शर्मा जी एवं स्व शारदा देवी शर्मा की पुण्य स्मृति में भाटापारा नगर में आयोजित शिवमहापुराण कथा आयोजन के छठवें दिन भी पं प्रदीप मिश्रा की वाणी से जनमानस को सनातन संस्कृति की शक्ति एवं भगवान के प्रति भक्ति से जीवन की कठिनता में सरलता प्राप्ति के उपाय प्राप्त हुए, साथ ही साथ समाज से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सरस सरल एवं गहरा मर्म लिए हुए विवेचन लोगों की संवेदना को जागृत करते हुए प्रतीत हुए। पारिवारिक एकता पर बल मनुष्य की सबसे अहम एवं महत्वपूर्ण ईकाई परिवार जो आज बाजारवाद पाश्चात्य वाद एवं स्वार्थपरता के चलते खंडित होती हुई प्रतीत हो रही है, जिसके चलते मनुष्य के दुखों का आरंभ घर से ही हो रहा है, तथा पारिवारिक एकता में आ रही दरार रिश्तों नातों को भी प्रभावित कर रही है, इस अहम विषय पर विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से अपनी गहरी व्याख्या प्रस्तुत करते हुए पंडित जी द्वारा रक्षाबंधन पर्व का उदाहरण देते हुए रिश्तों को महज लेन देन से जोड़ने के बजाय प्रेम के मजबूत धागों से जोड़ने का आव्हान किया गया। गौ धन एवं बेटी की महिमा भगवान शंकर की पुत्री अशोक सुन्दरी के परिणय प्रसंग का उल्लेख करते हुए पंडित जी द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि गौमाता और धन किसी को देते समय तथा अपनी बेटी का परिणय रिश्ता तय करते समय बहुत सोच विचार करना चाहिए तथा सुपात्र का चयन करना चाहिए, समाज में एक मोटिवेटर की तरह उभर रहें पं प्रदीप मिश्रा से लोग बड़ी संख्या में जुड़ते हुए और उनके मार्गदर्शन का अनुकरण करते हुए भी प्रतीत हो रहें है, जिसकी बानगी कथा पंडाल में उमड़ते जन सैलाब तथा मंदिरों के प्रति बढ़ते रुझान के रूप में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यातायात पुलिस एवं अन्य प्रकल्पों का सराहनीय योगदान लाखों लाख लोगों की उमड़ती भीड़ छोटी पड़ती जगह फिर भी श्रोताओं का गजब का दर्शनीय अनुशासन, साथ ही साथ व्यवस्था को व्यवस्थित करने में लगी हुई भाटापारा की पुलिस प्रशासन एवं यातायात विभाग एवं दूर दूर से कथा स्थल में आ रहे श्रोतागणों के लिए नगर के विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों द्वारा जलपान एवं पेयजल की व्यवस्था, इसके अलावा स्थानीय जनों द्वारा भी व्यवस्था में सहयोग के लिए योगदान इस महाआयोजन को बड़े ही सुन्दर ढंग से अपनी पूर्णता की ओर ले जाती हुई प्रतीत हो रही, जनमानस के बीच चर्चा का विषय बन चुकी इस महाआयोजन के संबंध में बुजुर्गों का कहना है कि भाटापारा के इतिहास में ऐसे विशाल महा आयोजन की बानगी नहीं मिलती है, जिसमें लाखों लाख लोगों की उपस्थिति हुई हो और भव्य वातावरण बना हो।