नई दिल्ली। कोरोना महामारी से देश को भारी आर्थिक क्षति हुई है। लेकिन देश इन आर्थिक झटके से उबरने लगा है। यह संकेत देश में आर्थिक गतिविधियां तेज होने से मिल रहा है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी गुरुवार को अर्थव्यवस्था में तेजी की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2021-22 में देश की आर्थिक विकास दर 9.5 फीसदी रहने का भरोसा है। मौजूदा आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए रिजर्व बैंक को यह आशा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अगस्त तक देश में कोविड-19 की दूसरी लहर का प्रभाव कम हो गया है। दूसरी तिमाही से आर्थिक विकास और अच्छा होगा। मीडिया संस्थानों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि आरबीआई ने महामारी के कारण विकास पर अधिक जोर देने और सरकार द्वारा निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत तक मुद्रास्फीति दर के लक्ष्य को ध्यान में रखकर कदम उठाए। मुद्रास्फीति दर 4 फीसदी लाने का लक्ष्य गवर्नर शक्तिकांत दास बोले कि केंद्रीय बैंक धीरे-धीरे मुद्रास्फीति दर 4 फीसदी पर लाने के लक्ष्य पर काम करेगा। महंगाई या मुद्रास्फीति दर में लगातार वृद्धि की उम्मीद कम है। दास ने कहा कि वैश्विक बाजार में तरलता की आसान स्थिति के कारण घरेलू बाजार में तेजी दिखाई दे रही है। बैंकिंग क्षेत्र का जिक्र करते हुए गवर्नर ने कहा कि जून तिमाही में एनपीए 7.5 फीसदी पर था। इसका प्रबंधन किया जा सकता है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है। क्रिप्टोकरंसी (cryptocurrency) को लेकर सरकार को चिंता से अवगत करा दिया- गवर्नर क्रिप्टोकरंसी के मामले में शक्तिकांत दास ने कहा कि यह रिजर्व बैंक ने इसे लेकर सरकार को अपनी गहरी चिंता से अवगत करा दिया है। अब सरकार को तय करना है कि वह ऐसे मामलों से कैसे निपटे। भारतीय अर्थव्यवस्था में निजी क्रिप्टोकरंसी से निपटने के लिए हमें जिम्मेदारीपूर्ण जवाब चाहिए। निर्यातकों के बकाया 56 हजार करोड़ से ज्यादा का रिफंड जल्द उधर, केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि वह देश के 45 हजार से ज्यादा निर्यातकों के 56 हजार करोड़ रुपए से अधिक के टैक्स रिफंड को जारी करने वाली है। केंद्र सरकार ने विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के तहत मिलने वाला टैक्स रिफंड जल्दी जारी करने जा रही है। 45 हजार से अधिक निर्यातकों को 56,027 हजार करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया जाएगा। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पत्रकारों को बताया कि निर्यातकों की यह बकाया राशि इसी साल जारी की जाएगी। 'वी' आकार के सुधार से आर्थिक बुनियाद मजबूत- वित्त मंत्रालय देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बाजवूद वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में 'वी' आकार के सुधार से भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद का पता चलता है। मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून के आंकड़े बताते हैं कि जीडीपी विकास दर 20.1 फीसदी रही है। यह चीन से भी बेहतर आंकड़े हैं, क्योंकि पहली तिमाही में चीन की विकास दर 7.9 फीसदी दर्ज की गई है। यानी यह माना जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था चीन के मुकाबले तेजी से सुधरी है। पिछले वित्त वर्ष यानी 2020-21 की पहली तिमाही में विकास दर नेगेटिव में चली गई थी। तब यह -24.4 फीसदी दर्ज की गई थी। हालांकि वित्त मंत्रालय ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में केरल और महाराष्ट्र में बढ़ते कोरोना के मामलों पर चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय ने इन दोनों राज्यों में महामारी को काबू करने और प्रबंधन को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। मानसून नौ फीसदी कम वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक मानसून नौ फीसदी कम है। लेकिन तब भी तीन सितंबर तक खरीफ की बुआई सामान्य स्तर की तुलना में 101 फीसदी हो चुकी थी। इसके अलावा धान की रिकॉर्ड खरीद और ट्रैक्टर की बिक्री में वृद्धि से आने वाले महीनों में मजबूत ग्रामीण मांग से अच्छे संकेत मिलते हैं। इतना ही नहीं, बिजली की खपत, ई-वे बिल, डिजिटल लेनदेन और मजबूत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह से भी सुधार के संकेत मिलते हैं। महामारी के पहले जैसे हालात की ओर भारत कुछ दिनों पहले देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा था कि बाहरी क्षेत्र बेहतर स्थिति तैयार कर रहा है। फॉरेक्स रिसर्व बढ़ रहे हैं। महामारी के चलते आपूर्ति में समस्याएं आने के बावजूद महंगाई वैश्विक आर्थिक संकट (जीएफसी) के मुकाबले कहीं कम थी। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम खपत और ऑटो बिक्री के क्षेत्र में आ रहा स्थिर सुधार संकेत कर रहा है कि हालात महामारी से पहले जैसे हो रहे हैं। यह भी पढ़े- Tokyo Paralympics : भारत का बेहतरीन प्रर्दशन, 5 स्वर्ण समेत कुल 19 पदक जीते, जानिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के बारे यह वीडियो देखें-