सीएम भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल को जमानत, आपत्तिजनक टिप्पणी पर हुई थी जेल...

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल को कोर्ट से जमानत मिल गई है। नंदकुमार बघेल की ओर से वकील गजेंद्र सोनकर ने याचिका लगाई दी थी। सुनवाई के बाद प्रथम श्रेणी न्यायाधीश जनक कुमार हिड़गो की बेंच ने जमानत दी की है। ब्राह्मण समाज के खिलाफ टिप्पणी करने पर नंदकुमार की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद अदालत ने 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया था। बता दें कि कुछ दिनों पहले सामाजिक कार्यकर्ता नंदकुमार बघेल उत्तर प्रदेश के दौरे पर गए हुए थे। इस दौरान लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बघेल ने कहा था कि जिसका वोट, उसी की सरकार। उन्होंने आगे बताया कि ब्राह्मण विदेशी हैं, जिस तरह अंग्रेज यहां से गए, वो भी यहां से जाएंगे। ब्राह्मण सुधर जाएं, या तो जाने के लिए तैयार रहें। नंदकुमार बघेल ने कहा था कि ब्राह्मणों से इसलिए नाराजगी है, कि वह विदेशी हैं। हमारे सारे अधिकार छीन रहे हैं। बघेल ने कहा था कि गांवों में भी अभियान चलाकर उनका बहिष्कार करेंगे। इस बयान के बाद सर्व ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने डीडी नगर थाने में शिकायत की है। पुलिस ने मामले की जांच के बाद नंदकुमार बघेल के खिलाफ साम्प्रदायिक भावना भड़काने और सामाजिक माहौल खराब करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिता के बयान पर जताया था दुःख  मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने पिता के बयान पर दुःख जताई थी। उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया में यह बात कही जा रही है कि नंदकुमार बघेल पर इसलिए कार्यवाही नहीं होगी क्योंकि वे मुख्यमंत्री के पिता हैं।

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भूपेश बघेल ने कहा था कि एक पुत्र के रूप में मैं उनका सम्मान करता हूं, लेकिन एक मुख्यमंत्री के रूप में उनकी किसी भी ऐसी गलती को माफ नहीं किया जा सकता जो सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने वाली हो। उनकी सरकार सभी को एक ही दृष्टि से देखती है। उनकी सरकार में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है फिर चाहे वो मुख्यमंत्री के 86 साल के पिता ही क्यों न हो। केस दर्ज हो जाने के बाद नंदकुमार बघेल ने ब्राह्मण समाज के खिलाफ की गई टिप्पणी पर खेद व्यक्त की थी। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा कि मेरी किसी बात से किसी को आहत हुई है, तो मैं खेद व्यक्त करता हूं। साथ अपने पोस्ट में लिखा है कि मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक लोगों के लिए जेल क्या जान देने के लिए तैयार हूं। जब तक जान है तब तक इनके हक के लिए लड़ते रहूंगा।  यह भी पढ़े- नौकरी के अवसर : छत्तीसगढ़ में प्रोफेसरों की होगी बंपर भर्ती, ADPPO के पदों के लिए भी भर्तीपढ़िए डिटेल में

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