शिक्षा और स्वास्थ्य कर्मियों के आंदोलन की जीत, सरकार ने कमेटी गठित करने दिए निर्देश...

रायपुर। आंदोलनरत दिवंगत पंचायत शिक्षकों की विधवा महिलाओं व स्वास्थ्यकर्मियों की आवाज अब जिम्मेदारों तक पहुंची है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दोनों मामलों की समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिक्षककर्मियों के अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों की समीक्षा और उनके निराकरण के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए है. यह कमेटी शिक्षककर्मियों की अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित पात्रताओं का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को देगी, जिस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री बघेल ने इसी तरह कोरोना महामारी के दौरान सेवा में लिये गए कोविड स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा-निरंतरता और उनकी सेवा शर्तां के लिए भी वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए है। यह कमेटी भी इन स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा निरंतरता और सेवा शर्तां के संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को देगी। जिस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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कमेटी कब रिपोर्ट देगी बड़ा सवाल

सरकार ने तो दोनों मामलों में कमेटी गठित करने को लेकर निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन क्या विधवा महिलाओं को अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी। ये बड़ा सवाल है। इसी तरह कोरोना काल में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की नौकरी क्या यथावत रहेगी। इस पर कमेटी कब अपनी रिपोर्ट देगी। कही सरकार आंदोलन खत्म करने के लिए यह फैसला तो नहीं लिया है। राज्य सरकार ने शराबबंदी को लेकर भी एक कमेटी गठित की है। इसको लेकर अभी क्या हुआ कुछ पता नहीं चलता। आम जन में एक धारणा है कि कमेटी किसी मामले को टालने के लिए गठित की जाती है।

मंत्री टीएस सिंहदेव ने दिया था बयान

दिवंगत पंचायत शिक्षकों की विधवा महिलाओं के हड़ताल को लेकर पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा था कि नियमित कर्मचारी होने पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान होता है। अनियमित कर्मचारियों के लिए यह प्रावधान नहीं है। उनकी भर्ती नियमित नहीं थी। इनके लिए प्रावधान नहीं है। इनकी मांगे शासन के पास रखी गई है, वहां से अनुमति मिलेगी, तभी अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। कांग्रेस ने घोषणा पत्र में वादा जरूर किया था, लेकिन जो अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में हैं उनके लिए था। नियम कानून में अड़चन थी, उसमें संशोधित किया गया है। जो लिमिट थे उसे भी हटा दिया गया है। जो नियुक्ति के पात्र है, उन्हें दिया गया है। सिंहदेव ने कहा कि जो कॉन्ट्रैक्ट और ठेकेदार के अंडर में काम करते हैं, उन्हें सरकारी नहीं माना जा सकता है, इसलिए सरकारी नियमों का लाभ नहीं मिलता है। यह वीडियो देखें-