छत्तीसगढ़ में 2023 विधानसभा की तैयारी : कांग्रेस के 10 नेता भाजपा में शामिल, दिल्ली में डी पुरंदेश्वरी ने दिलाई पार्टी की सदस्यता
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के बड़े नेता वेदराम मनहरे शनिवार को बीजेपी में शामिल हो गए। उनके साथ 10 और कार्यकर्ता भाजपा ज्वाइन किया है। इसे विधानसभा 2023 की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय बीजेपी और मुखर होगी। सड़क पर कई मुद्दों के लेकर लड़ाई होगी।
दिल्ली में छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी ने सभी कांग्रेसियों को भाजपा का गमछा पहनाकर पार्टी में शामिल कराया। इस दौरान मनहरे को भाजपा शामिल कराने में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता नन्दकुमार साय भी मौजूद थे।
वेदराम मनहरे तिल्दा जनपद पंचायत के दो बार अध्यक्ष, दो बार उपाध्यक्ष रह चुके हैं। हाल ही में उन्हें कांग्रेस ने अन्तर्व्यवसायी निगम मंडल का सदस्य नियुक्त किया था।
वेदराम मनहरे के साथ भाजपा में प्रवेश करने वाले कांग्रेसियों में जनपद पंचायत तिल्दा सरपंच संघ के अध्यक्ष और ग्राम पंचायत परसदा के सरंपच मिथलेश साहू, पचरी के सरपंच अभिषेक वर्मा, संयुक्त महामंत्री रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी पुरनेंद्र नायक, जनपद पंचायत तिल्दा के सदस्य अरुण भारद्वाज शामिल हैं।
इनके साथ रायपुर जिला पंचायत के पूर्व सदस्य राजू ओगरे, अनिल सोनवानी, दीपेंद्र वर्मा, सभापति जनपद पंचायत आरंग, किसान संघर्ष समिति नवा रायपुर के अध्यक्ष विकास टंडन, गोविंद साहू, सभापति, जनपद पंचायत आरंग और टीका पटेल भी बीजेपी में शामिल हुए हैं।
कांग्रेस ने मुझे उचित स्थान नहीं दिया- वेदराम
वेदराम मनहरे ने कहा कि जीवन का अर्थ केवल संघर्ष में है। मैंने राजनीति शुरू की तब से कांग्रेस का दामन थामा था। कार्यकर्ता से लेकर बड़े पदों पर भी रहा लेकिन मेरे अंदर का कार्यकर्ता हमेशा जीवित रहा। पिछले कुछ वर्षों से पार्टी की विचारधारा मेरे काम करने के तरीकों से मेल नहीं खा रही थी। मुझे कभी पद की लालसा नहीं रही लेकिन पिछले कुछ समय से एक वरिष्ठ कांग्रेसी होने के नाते मुझे जो स्थान कांग्रेस में मिलना चाहिए था, वो नहीं मिल रहा था। मेरी व्यक्तिगत किसी से कोई नाराजगी नहीं है।
दिल्ली में सदस्यता पर कई सवाल
बता दें कि वेदराम मनहरे गुरुवार को बीजेपी के दिग्गज नेता नंद कुमार के साथ दिल्ली रवाना हुए थे। उस दौरान ये जानकारी सामने आई थी कि मनहरे को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पार्टी में शामिल कराएंगे। यह भी बताया गया था कि मनहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर प्रदेश की सियासी हलचलों की जानकारी देंगे। अब डी पुरंदेश्वरी के सदस्यता दिलाने पर यह कहा जा रहा है कि वेदराम मनहरे भले जनाधार वाले नेता है लेकिन उनका कद उतना बड़ा नहीं है, इसलिए जेपी नड्डा या भाजपा के किसी बड़े नेता ने सदस्यता नहीं दिलाई।
विधानसभा चुनाव 2023 की तैयारी
वेदराम मनहरे के इस तरह से बीजेपी में शामिल होने को कांग्रेस को बड़ा झटका लगने के रूप में माना जा रहा है। वहीं यह भी माना जा रहा है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने 2023 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के मद्देनजर अभी से कमर कस ली है। बस्तर चिंतन बैठक में विधानसभा 2023 की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई। इसके बाद यह कवायद इसी कड़ी से जुड़ी हुई है।
महीनों से थे भाजपा के संपर्क में
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खरोरा निवासी वेदराम मनहरे के गृहनगर और आरंग में बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान हैं। आरंग और धरसीवां विधानसभा, बलौदाबाजार, कसडोल विधानसभा क्षेत्रों में उनकी अच्छी सियासी पकड़ है। चर्चा है कि वेदराम और बड़ी संख्या में उनके समर्थक कांग्रेस संगठन में अपनी लगातार उपेक्षा से परेशान थे। उनके साथी लगातार उनसे इस बाबत शिकायत कर रहे थे। उन्होंने अपनी बात कई बार संगठन तक पहुंचाई पर खेमों में बटी कांग्रेस ने उन्हें तवज्जो नहीं दी। कांग्रेस के प्रदेश संगठन द्वारा पिछले कुछ दिनों से लगातार की जा रही उनकी व समर्थकों की उपेक्षा से वे खासे परेशान थे तथा 6 माह से भाजपा के संपर्क में थे।
दो विधायकों से नहीं बैठी पटरी
ब्लॉक कांग्रेस में एक गुट संगठन का तो दूसरा मनहरे और उनके समर्थकों का था। मनहरे गुट का कहना है कि धरसीवां विधायक अनीता योगेंद्र शर्मा व आरंग विधायक डॉ. शिव डहरिया से उनकी पटरी नहीं बैठ रही थी। डॉ. डहरिया से तो उनकी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी रही है। इस खेमे का यह भी आरोप है कि अनीता योगेश शर्मा राजनीति में आने से पहले बड़ा चेहरा नहीं थीं।विधायक बनने और उसके बाद वेदराम मनहरे के समर्थकों को तवज्जो देना बंद कर दिया।
कांग्रेस में रोकने बुधवार को हुई थी आखिरी कोशिश
जानकारी के मुताबिक, रायपुर जिला ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष उधोराम वर्मा ने पिछले दिनों पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाकर 8 पदाधिकारियों को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। निष्कासित सारे पदाधिकारी विधायक अनीता के समर्थक थे और यह कार्रवाई वेदराम की शिकायत पर ही की गई थी। यह कार्रवाई करके संगठन वेदराम को रोकने का आखिरी प्रयास कर रहा था लेकिन वे दिल्ली उड़ ही गए। अब सारे निष्कासन रद्द होने की भी खबर है।
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