कांग्रेस हाईकमान का पंजाब के बाद छत्तीसगढ़ पर फोकस : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समर्थन में 15 विधायक पहुंचे दिल्ली, कही ये बड़ी बात...

रायपुर। पंजाब का मामला निपटाने के बाद कांग्रेस हाइकमान की नजर अब छत्तीसगढ़ पर है। जिससे प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। विधायक बृहस्पत सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के 15 कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि यह कार्यक्रम के अनुसार, विधायक छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया से मुलाकात करेंगे। उन्हें प्रदेश की राजनीतिक स्थिति की जानकारी देंगे। दिल्ली पहुंचे कांग्रेसी विधायक बृहस्पति सिंह ने एक मीडिया को बताया कि 60 विधायकों ने लिखित में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपना समर्थन दिया है। भूपेश बघेल अच्छा काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में ही सरकार चलेगी। हाईकमान का आशीर्वाद उनके साथ है। राज्य की तीन करोड़ जनता उनके साथ है। भूपेश बघेल के नेतृत्व में 25 साल तक सरकार चलेगी। हम यहां प्रभारी से मिलेंगे। वक़्त मिला तो आलकमान से मिलेंगे। खुलकर अपनी बात रखेंगे। सूत्रों का कहना है कि इनके अलावा भी कई और कांग्रेस विधायक दिल्ली दौरे पर जा सकते हैं। दिल्ली जाने वालों में चंद्रदेव राय, विकास उपाध्याय, बृहस्पत सिंह, गुलाब कमरो, रामकुमार यादव, यूडी मिंज, पुरुषोत्तम कंवर, विनय जायसवाल, मोहित केरकेट्टा, गुरु दयाल बंजारे, पारसनाथ राजवाड़े, द्वारिकाधीश यादव, सहित 15 विधायक शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री किसान का बेटा भूपेशबने रहेंगे या राजा सिंहदेवबनेगा, आज ये लेंगे फैसला बता दें कि प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया लखनऊ दौरे पर है। वे प्रियंका गांधी के कार्यक्रम में शामिल होने वाले है। मीडिया से उन्होंने कहा कि फिलहाल विधायकों से मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं है।

मंत्री टीएस सिंहदेव का बड़ा बयान

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने विधायकों के दिल्ली दौरे पर बड़ा बयान दिया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कहा कि भले ही वो कह रहे हैं कि विकास की बात करने गए हैं। विकास कार्य दिखाने के लिए ये कार्यक्रम तय मुख्यमंत्री करते हैं। मुख्यमंत्री के ऊपर जाकर कोई आमंत्रण दें, तो आलाकमान कहेंगे मैं मुख्यमंत्री से बात करता हूं। करीब 1 महीने पहले छत्तीसगढ़ के विधायकों ने दिल्ली कूच किया था। मुख्यमंत्री भूपेश भी पहुंचे थे। राहुल गांधी के घर से बाहर आए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि छत्तीसगढ़ के विकास पर बात हुई और उन्हें प्रदेश आने का न्योता दिया गया। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है और वह संभवतः अगले सप्ताह छत्तीसगढ़ आ सकते हैं। इस दौरान भूपेश ने आप सीएम रहेंगे या नहीं इस सवाल पर पूरे आत्मविश्वास से कहा कि था  ‘मैंने तो उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में ही छत्तीसगढ़ आने का न्योता दिया है।’ ढाई साल के बाद दूसरे को सत्ता सौंपने के सवाल पर उन्होंने फिर कहा कि ऐसी कोई बात नहीं हुई। हालांकि एक महीना बीतने को है राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ आने का कोई कार्यक्रम अब तक तय हुआ।

पंजाब में कैप्टन की छुट्टी, अब छत्तीसगढ़ पर नजर!, लेकिन यहां संभव नहीं

राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर को हटाने के बाद अब कांग्रेस हाईकमान की नजर छत्तीसगढ़ पर है। लेकिन यहां की स्थिति पंजाब से उलट है। लगभग 60 विधायक मुख्यमंत्री के समर्थन में है। संगठन के अधिकांश नेता भी उनके साथ है। इसके बावजूद कांग्रेस मुख्यमंत्री बदलने पर विचार कर रही है। लेकिन यहां ऐसा कदम उठाना आसान नहीं होगा। मुख्यमंत्री बदलने का फॉर्मूला अपनाने वाली भाजपा ने कई राज्यों में बदले लेकिन उत्तर प्रदेश में नहीं बदल सकी। क्या छत्तीसगढ़ में भी ऐसा होगा ये देखने वाली बात होगी।  सीएम बदलने का फॉर्मूला कांग्रेस में भी, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा

 ढाई-ढाई साल का कथित फॉर्मूला

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस क जीत के बाद मुख्यमंत्री के नामों को लेकर काफी गहमागहमी हुई थी। तभी ताम्रध्वज साहू का नाम फाइनल कर दिया गया था। इसके बाद भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव ने इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला अपनाया गया था। ऐसा राजनीति के जानकारों का कहना है। इस पर किसी भी नेता खुलकर बयान नहीं दिया है। अब कांग्रेस विधायक के दिल्ली दौरे से ढाई-ढाई साल का मामला एक बार फिर सामने आ गया है। मीडिया प्रोपेगेंडा में फंसी कांग्रेस! राजनीतिक के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए तात्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने सड़क की लड़ाई लड़ी थी। सीधे बीजेपी के सत्ता से संघर्ष लिया था। उन्होंने भाजपा के नेताओं के साथ मंच साझा तक करने से इंकार कर दिया। ताकि जनता में विपक्ष की साफ छवि जाए। वहीं सिंहदेव नेता प्रतिपक्ष थे। उन्होंने घोषणा पत्र बनाने में मदद की थी। लेकिन पार्टी को सत्ता सड़क पर लडाई लड़ने से मिली थी। लोगों को 15 साल के कुशासन के बारे में बताया गया। प्रदेश में एंटी इंकबेसी का माहौल बनाया गया। जब कांग्रेस ने राज्य में एकतरफा जीत हासिल की तो उसे भूपेश के नेतृत्व में जीत बताया गया। लेकिन जब मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो एक रणनीति के तहत कई नाम उछाले गए। ताकि भूपेश सीएम न बन सके। यही भाजपी भी चाहती थी, क्योंकि अगले बार कमजोर नेतृत्व को आसानी से हटाया जा सके।  राहुल गांधी पर अभद्र भाषा का प्रयोग : टीवी एंकर के बिगड़े बोल पर सीएम भूपेश ने दी चेतावनी, बीजेपी के अमित मालवीय और डॉ रमन ने किया बचालाव! नवजोत सिद्धू की गुगली या हिट विकेटकांग्रेस अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा Our players have understood their roles and responsibilities: Dhoni on turnaround Hindi News के लिए जुड़ें हमारे साथ इस वॉट्सएप ग्रुप में…( इसे क्लिक कीजिए)