नई शिक्षा नीति : सरकारी स्कूलों में बाल वाटिका, होगी नर्सरी की पढ़ाई, 54 हजार करोड़ रुपए का बजट
नई दिल्ली। देशभर के स्कूलों में अब नर्सरी की पढ़ाई होगी। नई शिक्षा नीति में प्री-स्कूल की बात कही गई है। इसके साथ ही मिड-डे मील योजना का नाम बदल दिया गया है। यह योजना अब पीएम पोषण योजना के नाम से जानी जाएगी। ये योजना सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए देशभर में लागू होगी।
पीएम मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई सीसीईए की बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की इस योजना में कई बदलावों को मंजूरी दी गई। अगले पांच साल के लिए इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने 54 हजार करोड़ रुपए का बजट रखा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मुताबिक, अब स्कूलों में बाल वाटिका की व्यवस्था करके प्री-स्कूल कक्षाएं भी शुरू की जा रही है। इस पर राज्य सरकार के 31,700 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके अलावा खाद्या पर केंद्र सरकार अलग से 45 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस तरह से पांच साल के दौरान योजना पर कुल 1.30 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
तिथि भोजन कार्यक्रम
बच्चों में चीजें साझा करने की आदत विकसित करने के लिए तिथि भोजन कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत सीबीएसई विद्यार्थी माह में एक दिन अपने साथ दो बच्चों का टिफिन लाएंगे। इस दिन ये राज्य सरकार के किसी स्कूल में जा कर वहां के छात्रों के साथ अपना भोजन करेंगे।
सीधे स्कूलों को भेजे जाएंगे रुपए
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्र- स्कूली शिक्षा को भी शामिल करने की बात कही है। इसे ध्यान में रखते हुए अब स्कूलों में बाल वाटिकाएं शुरू की जा रही है। दोपहर के भोजन की मौजूदा योजना की व्यापक समीक्षा की गई है। अब धन का रिसाव पूरी तरह बंद होगा और अधिकतम पारदर्शिता आएगी। इसके लिए पीएम पोषण योजना में डीबीटी के तहत सीधे स्कूल को धन भेजा जाएगा।
- देश के 11 लाख 20 हजार स्कूलों के 11 करोड़ 80 लाख बच्चों पर लागू होगी
- अगले पांच साल में कुल 1.30 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे इस योजना पर
- बीते साल केंद्र सरकार ने इस योजना पर 24 हजार करोड़ रुपए खर्च किए
- अब योजना का नाम प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना(पीएम पोषण) होगा
पहले राष्ट्रीय स्कूल मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के नाम से जाती थी।
- सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में योजना आठवीं तक के लिए है
छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी में नर्सरी कक्षा की चर्चा
देश में नई शिक्षा नीति आने से पहले छत्तीसगढ़ में प्री-नर्सरी कक्षा की चर्चा हुई थी। बीजेपी शासन काल में महिला एवं बाल विकास मंत्री रमशिला साहू ने दुर्ग जिले में नर्सरी कक्षा शुरू करने की बात कही थी। लेकिन ये सिर्फ घोषणा ही साबित हुई। प्रदेश में यह योजना शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद बीजेपी सत्ता से चली गई। कांग्रेस को सत्ता मिलने के 2 साल बाद आंगनबाड़ी में भी नर्सरी कक्षा शुरू करने की घोषणा की गई। कई बार इस योजना का जिक्र महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंडिया कर चुकी है। लेकिन अब तक छोटे बच्चों के लिए नर्सरी कक्षा शुरू नहीं की गई।
जानकारी के मुताबिक, दुर्ग जिले के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छोटे बच्चों को पढ़ाने लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार की गई है। तीन से पांच साल के बच्चों को पढ़ाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पढ़ाने की कला भी सिखाई जाएगी। उनके लिए अलग से 6 महीने का ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार हो चुका है, इससे वह न केवल बच्चों की देखभाल कर सकेंगे, बल्कि उन्हें प्राइमरी स्कूल के लिए तैयार भी कर सकेंगे। तर्क दिया जा रहा है कि ग्रामीण और नगरीय इलाकों में छोटे बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र ही भेजा जाता है। बच्चों को बोलना-सीखना सिखाया जाएगा।
जानिए नई शिक्षा नीति में नर्सरी की पढ़ाई समेत कई बिंदु-
- कोर्स को 5 + 3 + 3 + 4 के आधार पर बांटा गया है। इसमें प्री प्राइमरी (नर्सरी की पढ़ाई), प्राइमरी, मिडिल, हाई और हायर सेकंडरी कक्षा शामिल हैं।
- संज्ञानात्मक और सामाजिक भावनात्मक विकास के आधार पर किए जाएंगे पाठ्यक्रम तैयार और होगी शैक्षणिक संरचना।
- वर्ष 2030 तक शिक्षा का अधिकार के दायरे में मिडिल से लेकर हायर सेकंडरी स्कूल तक को लाया जाएगा।
- जरूरत के अनुसार बच्चों के सुरक्षित और व्यवहारिक आवागमन के लिए साधन बनाए जाएंगे।
- स्कूलों में सामाजिक कार्यकर्ता और परामर्शदाता की नियुक्ति की जाएगी।
- ट्रेनिंग के दौरान त्रिभाषा फार्मूला अंग्रेजी, हिंदी और मातृभाषा में पढ़ाई होगी। स्कूल का समेकन होगा।
- बच्चों के साथ सरल-सहज व्यवहार के अलावा उन्हें क्रिएटीविटी बनाने के लिए भी टिप्स दिए जाएंगे।
Our players have understood their roles and responsibilities: Dhoni on turnaround