छत्तीसगढ़ में आखिर शराबबंदी कब : सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने दिए ये सुझाव, लेकिन अधिकारियों ने गिनाई इनकम, निकला दौरे का निष्कर्ष...

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में शराबबंदी का वादा किया था। लेकिन सत्ता मिलने के बाद कांग्रेस सरकार ने पौने तीन साल बाद भी अपना वादा पूरा नहीं किया है। सरकार ने सिर्फ सर्वदलीय समिति बनाई है। जिसकी बैठक नहीं करने का आरोप भाजपा ने लगाया है। वहीं बुधवार (29 सितंबर को) को नवा रायपुर के वाणिज्यिक कर भवन में सामाजिक संगठऩों के प्रतिनिधियों से इस विषय पर चर्चा की गई। लेकिन इस बैठक में शराबबंदी पर सभी समाज एक राय नहीं हो सके। बैठक में सिख, मुस्लिम और अन्य समाज के प्रतिनिधि पूर्ण शराबबंदी का नुकसान बताने लगे तो इससे पहले अफसरों ने भी शराबबंदी से होने वाले राजस्व नुकसान और अवैध कारोबार बढ़ जाने का खतरा बताया।  शराबबंदी का अधिकार ग्रामसभा को दें- आदिवासी समाज सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष भारत सिंह बैठक में बोले कि हर बार शराब की मान्यता को लेकर आदिवासी समाज का जिक्र आता है। शराब हमारी परंपरा और अनुष्ठानों में शामिल है, लेकिन इसे कम भी किया जा सकता है। समाज जागरुक हो रहा है। उन्होंने कहा, अनुसूचित क्षेत्रों में शराबबंदी का अधिकार ग्राम सभाओं को दे देना चाहिए। वे अपनी परंपरा और परिस्थिति के मुताबिक इसे लागू करें।

कलार समाज की ओर से किरण सिन्हा ने की प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की मांग

कलार समाज की प्रतिनिधि किरण सिन्हा ने बैठक में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से परिवार टूट रहे हैं। सबसे अधिक दिक्कत महिलाओं और बच्चों के सामने है। सरकार नशा मुक्ति केंद्र, अवैध शराब की रोकथाम आदि की व्यवस्था करे और प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू करे।

सिख समाज के प्रतिनिधि ने किया विरोध

सिख समाज के प्रतिनिधि जशवीर सिंह घुमन ने पूर्ण शराबबंदी का सीधे तौर पर विरोध किया। उन्होंने कहा कि, देशी शराब की बिक्री बंद कर दी जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की दुकानें कम कर दी जाएं। मुस्लिम समाज ने आदिवासी परंपरा की दुहाई दी। उनके प्रतिनिधि शेख नाजीमुद्दीन बोले कि यहां की बड़ी आबादी आदिवासी बाहुल्य है। जिस समाज में शराब की मान्यता है वहां पूर्ण शराबबंदी लागू होने से व्यवस्था बिगड़ जाएगी।

छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी की जगह सरकार कोचियों पर लगाम- रमेश यदु

यादव समाज के रमेश यदु ने बैठक में कहा कि पूर्ण शराबबंदी की जगह सरकार कोचियों पर लगाम लगाए। ऐसे ही विचार कुछ और समाज प्रतिनिधियों की ओर से भी आए। कुछ लोगों का सुझाव था कि शराब की दुकानों को धीरे-धीरे कम कर दिया जाए और मूल्य बढ़ा दिया जाए। इससे यह लोगों की पहुंच में नहीं रहेगी और लोग शराब से दूर हो जाएंगे।  छत्तीसगढ़ में कितने नशा मुक्ति केंद्र हैं- अग्रवाल समाज अग्रवाल समाज के प्रतिनिधि ने पूछा कि सरकार की मंशा अगर छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी की है तो बताए कि प्रदेश में कितने नशा मुक्ति केंद्र संचालित हैं। आबकारी अधिकारी इसका जवाब नहीं दे पाए। अग्रवाल समाज के प्रतिनिधि का सुझाव था, शराब पर लगने वाले उप कर को नशा मुक्ति केंद्रों के संचालन पर खर्च किया जाए।

बैठक में सिर्फ लिए सुझाव, शराबबंदी वाले राज्यों में दल भेजने की बात

सामाजिक संगठनों से जो सुझाव आए, उसे अब शराबंदी पर बनी सर्वदलीय समिति को भेजा जाएगा। इसके अलावा शराबबंदी वाले राज्यों का अध्ययन के लिए समाज के प्रतिनिधियों का दल भी भेजा जाएगा। साथ इस मुद्दे पर विचार करने के लिए जल्दी ही एक और बैठक होगी।

कोरोनाकाल में शराब से 300 करोड़ की आय

मीडिया को दिए अपने बयान में आबकारी विभाग के सचिव निरंजन दास ने कहा कि कोरोनाकाल में ही शराब से 300 करोड़ रुपए की आय सरकार को हुई है। पूर्व में हरियाणा-आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पूर्ण शराबबंदी लागू थी, उन्हें अपने कदम वापस खींचने पड़े हैं। कई राज्यों में शराब और दूसरे नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री बढ़ गई। अपराध बढ़ गए। ऐसी स्थिति में नुकसान है। बाद में समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी।

बलरामपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट, एक भी देशी शराब दुकान नहीं

आबकारी विभाग के सचिव निरंजन दास ने मीडिया से कहा कि बलरामपुर जिले में शराबबंदी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। वहां देशी शराब की कोई दुकान नहीं है। अंग्रेजी शराब की भी केवल पांच दुकान संचालित हैं। धीरे-धीरे इसे भी बंद करने की रणनीति पर काम चल रहा है। यहां शराबबंदी के प्रभाव को देखने के बाद दूसरे जिलों में भी लागू किया जाएगा। निरंजन दास ने बताया कि राज्य सरकार ने करीब 50 शराब दुकानों को बंद किया है। एफएल-2 लाइसेंस बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रदेश में एक भी बीयर बार संचालित नहीं है। केवल कुछ सितारा होटलों को एफएल-3 लाइसेंस देने का प्रावधान है। राज्य सरकार शराबबंदी के लिए व्यापक जन चेतना अभियान चला रही है। प्रदेश की महिलाओं को नशा विरोधी अभियान में जोड़कर नशा के दुष्प्रभाव के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।  बैठक में अर्जुन हिरवानी, सालिक राम वर्मा, ललित बघेल, विनय तिवारी, एल.एल. कोसले, राजेन्द्रनाथ पटेल, राजेश वासवानी, पंकज जसवानी, कर्तव्य अग्रवाल, अनुराग अग्रवाल, वैष्णव क्षत्री, ओमप्रकाश मानिकपुरी, रामअवतार सिंह, और आनंद निषाद ने अपने-अपने समाज का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा अपर आयुक्त राकेश मंडावी, रायसिंह ठाकुर, तीनों समितियों के नोडल अधिकारी  राजीव कुमार झा उपस्थित थे।

चुनाव तक टालने की कोशिश तो नहीं

छत्तीसगढ़ के गांवों में शराब की नदियां बह रही हैं। युवा- बजुर्ग के नशे के चलते घर बर्बाद हो गए हैं। खेती खार बिक गई है। शराब को लेकर छत्तीसगढ़ की महिलाओं में आक्रोश है। लेकिन सरकार बार-बार समिति बनाकर और शराबबंदी वाले राज्यों का दौरे का बहाना बनाकर टाल रही है। कही इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टाला तो नहीं जा रहा है। यह एक बड़ा सवाल है। लेकिन इतना तो तय की प्रदेश की महिलाएं व समाजिक संगठन और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती। इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।  बता दें कि सरकार शराब से जबरदस्त कमाई कर रही है. चालू वित्तीय वर्ष में कमाई का लक्ष्य 5 हजार करोड़ रुपए रखा है। उसे समाज से कोई लेना देना है। समाज को भटकाने के लिए महात्मा गांधी के नाम पर नशा उन्मूलन का कार्यक्रम चला देंगे। और कुछ नहीं। यह भी पढे़- पूर्ण शराबबंदी पर सदन गरम : विपक्ष का बड़ा आरोप, भूपेश सरकार ढाई साल में सिर्फ समिति बनाई, जानें सरकार का जवाब हिरमी में MRP से अधिक दाम पर शराब की बिक्री, कर्मचारी और ग्राहक भिड़े…  Hindi News के लिए जुड़ें हमारे साथ इस वॉट्सएप ग्रुप में…( इसे क्लिक कीजिए) Our players have understood their roles and responsibilities: Dhoni on turnaround