अभिषेक सिंह पर एफआईआर : पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के बेटे और सांसद संतोष पांडेय के खिलाफ FIR
रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडेय पर भी केस दर्ज हुआ है। दोनों नेताओं के साथ कुल 14 नए नाम जोड़े गए हैं। इस पूरे मामले पर पुलिस अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
अभिषेक सिंह पर एफआईआर
दरअसल, कवर्धा में 5 अक्टूबर को धार्मिक हिंसा हुई थी। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए 59 लोगों का नाम शामिल किया था। लेकिन अब 14 और नाम जोड़े गए हैं।
इनमें भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ स्थानीय नेताओं के नाम शामिल हैं। राजनांदगांव-कवर्धा लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पुत्र और पूर्व सांसद अभिषेक सिंह का नाम शामिल हैं।
इन नेताओं के खिलाफ एफआईआर
इनके अलावा पूर्व विधायक मोतीराम चंद्रवंशी
अशोक साहू
भाजपा प्रदेश मंत्री विजय शर्मा
विश्व हिन्दू परिषद के जिला प्रमुख नंदलाल चंद्राकर
भाजपा जिलाध्यक्ष अनिल सिंह
भाजयुमो जिलाध्यक्ष पीयूष ठाकुर
वरिष्ठ नेता कैलाश चंद्रवंशी
राजेन्द्र चंद्रवंशी
पन्ना चंद्रवंशी
उमंग पांडेय
राहुल चौरसिया
भुनेश्वर चंद्राकर के नाम शामिल हैं
ये तमाम कबीरधाम भाजपा के प्रथम पंक्ति के नेता हैं।
59 लोगों की हुई थी गिरफ्तारी
इससे पहले तक मामले में 59 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। सभी पर बलवा समेत कई धाराएं लगाई गई हैं।
इन पर धारा 109, 147, 148, 149, 153 क, 188, 295, 332, 353 भादवि के अलावा लोक संपत्ति की क्षति की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने उपद्रव के बाद तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थी। भाजपा ने जब एफआईआर की कॉपी कोर्ट से निकलवाई तो पता चला कि वरिष्ठ नेताओं के नाम जोड़े गए हैं।
पुलिस कांग्रेस कमेटी हो गई- सांसद संतोष
सांसद संतोष ने कहा कि जो पीसीसी कहते हैं न प्रदेश कांग्रेस कमेटी को यह दरअसल पुलिस कांग्रेस कमेटी हो गई है। प्रशासन के साथ हुई बातचीत में 59 लोगों की गिरफ्तारी के बाद इस संख्या को आगे न बढ़ाने को लेकर आश्वासन दिया गया था। इन 59 लोगों में भी जो दोषी है नहीं है, उन्हें भी गिरफ्तार किया गया है। बाद में फिर से जो 14 नाम जोड़े गए हैं, यह राजनीतिक विद्वेष की भावना को दर्शाता है।
झंडा लगाने को लेकर विवाद
पूरा विवाद वार्ड नंबर 27 के लोहारा नाका चौका इलाके में झंडा लगाने को लेकर शुरू हुआ था। रविवार दोपहर कुछ युवकों ने अपना झंडा चौराहे पर लगा दिया। इसी बात को लेकर दो गुटों के युवक सड़क पर लाठी लेकर उतर गए। एक दूसरे की पिटाई की। पुलिस की आंखों के सामने एक युवक को भीड़ पीटती रही। मारपीट में 8 लोग घायल हुए हैं। इनका इलाज कवर्धा के अस्पताल में कराया जा रहा है। इसके बाद सोमवार को शांति समिति की बैठक बुलाई गई थी।
अल्पसंख्यक आयोग ने कलेक्टर को लिखी चिट्ठी
कवर्धा विवाद के बाद राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने कलेक्टर को चिट्ठी लिखी है. आयोग के अध्यक्ष महेंद्र छाबड़ा ने 9 बिंदुओ में जानकारी मांगी है। ये चिट्ठी 7 अक्ट्बर लिखी गई है। इसमें दंगा भड़काने के मूल कारण, धारा 144 के बाद निकाली गई रैली समेत अन्य बिंदुओ पर जवाब मांगा गया है। बताया जा रहा है कि आयोग की टीम जिले का दौरा कर सकती है।
पत्र में पूछा ये सवाल-
- सांप्रदायिक दंगा भड़कने का मूल कारण क्या है? आज तक कितने दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया?
- जिले में सांप्रदायिक सद्भाव फिर से स्थापित करने के लिए क्या समुदायों के प्रमुख और दोनों गुटों के बीव शांति समिति की बैठक की गई?
- क्या CCTV फुटेज की सहायता से दंगाइयों की पहचान हो पाई है? और उन पर क्या कार्रवाई की गई?
- दंगा प्रभावित क्षेत्र में कलेक्टर ने धारा-144 लागू कर दी थी, इसके बाद भी एक पक्ष ने रैली निकाली। इसकी अनुमति किसने प्रदान की?
- सांप्रदायिक दंगा 5 अक्टूबर को हुए नुकसान का अनुमान लगाने के लिए क्या किसी समिति का गठन किया गया है?
- क्या पीड़ितों की पहचान कर उन्हें तत्काल राहत पहुंचाने के लिए कोई मुआवजा राशि प्रदान की गई? अगर नहीं तो तत्काल राहत देने के लिए क्या किया गया?
- जिले में धारा-144 लागू होने के बाद भी जिले के बाहर से बड़ी संख्या में लोग कैसे अंदर प्रवेश कर गए?
- क्या जिले की वर्तमान स्थिति नियंत्रण में है? यह दंगा फिर से नहीं भड़के, इसके लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
- पीड़ित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रशासकीय स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं?
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