आभासी कंड रोग -

यह एक फूफंदी जनित रोग है। रोग के लक्षण पौधों में की बालियों के निकलने के बाद ही स्पष्ट होता है। रोग ग्रस्त दाने पीले से लेकर संतरे रंग के होते हैं। जो बाद में जैतूनी काले रंग के गोले में बदल जाता है।

उपचार -

खेतों में जलभराव अधिक नहीं होना चाहिए। रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रॉपेकोनेजोल 20 मिलीलीटर मात्रा में 15 से 20 लीटर पानी में घोलकर का छिड़काव करें।

कंडुआ रोग -

इस रोग के प्रकोप से धान की बालियों के जगह पीले रंग बाल बन जाता है। इसके बाद यह काले रंग का हो जाता है। यह रोग धान की फसल को 60 से 90ः तक नुकसान कर सकता है।

उपचार -

प्रॉपीकोनाजोल 25ः ईसी 1 मिलीलीटर, प्रति लीटर पानी के घोल में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं।

भूरा माहो -

यह कीट छोटे आकार तथा भूरे रंग का होता है। यह पौधे में पानी की सतह से थोड़ा ऊपर पत्तों के घने छतरी के नीचे रहते हैं। कीटों के बारे में शीघ्र पता नहीं चल पाने पर इसका नियंत्रण अधिक जटिल हो जाता है।

उपचार-

पायमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी -300 ग्राम प्रति हेक्टेयर, थायोमेथेक्जाम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी - 100-120 ग्राम प्रति हेक्टेयर, इमीडाक्लोरोप्रीड 17.8 प्रतिशत एसएल - 150-200 मि.ली. प्रति हेक्टेर, फिप्रोनिल 3 प्रतिशत $ ब्यूप्रोफेजिन 22 प्रतिशत- 500 मि.ली. प्रति हेक्टेयर, ब्यूप्रोफेजिन 15 प्रतिशत $ एसीफेट 35 प्रतिशत 50 ग्राम प्रति हेक्टेयर डाइनोटेफ्यूरॉन 20 प्रतिशत एस.जी. 175 ग्राम प्रति हेक्टेयर में से किसी एक दवा का प्रयोग किया जा सकता है। Hindi News के लिए जुड़ें हमारे साथ इस वॉट्सएप ग्रुप में…( इसे क्लिक कीजिए) छत्तीसगढ़ में धान खरीदी किस तारीख से होगी, सरकार और अधिकारी मौन… इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में सीटों की संख्या बढ़ी, अब 3676 सीट पर प्रवेश, युवाओं को मिलेंगे ज्यादा अवसर… मानसून की विदाई, अब सर्दी का मौसम, छत्तीसगढ़ में इस महीने ज्यादा ठंड… छत्तीसगढ़ पटवारी भर्ती : 301 पदों पर होगी भर्ती, सहायक ग्रेड-3 और भृत्य के 988 पद… स्कूली बच्चों के लिए दशहरादीपावली और शीतकालीन अवकाश की सूची जारीइस साल कुल 60 दिन की छुट्टीदेखिए लिस्ट Our players have understood their roles and responsibilities: Dhoni on turnaround