न्याय से अन्याय! : न कोरोना, न बारदाने की दिक्कत तो 1 नवंबर से धान खरीदी क्यों नहीं, जानिए वजह...
न्याय से अन्याय! : न कोरोना, न बारदाने की दिक्कत तो 1 नवंबर से धान खरीदी क्यों नहीं, जानिए वजह...
रायपुर। प्रदेश में कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है। प्रतिदिन कम मामले आ रहे हैं। वहीं इस साल बारदाने की भी दिक्कत नहीं है। इसके बावजूद धान खरीदी के तारीख की घोषणा अब तक नहीं की गई है। किसान कम कीमत पर धान मंडी में बेच रहे हैं।
सरकार से पूछा जा रहा है कि अगर कोई दिक्कत नहीं है तो पहले की तरह एक नवंबर से खरीदी क्यों नहीं हो रही है। पिछले साल कोरोना के चलते परेशानी हुई थी, लेकिन इस साल तो ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
हरहुना किस्म के धान की कटाई
दरअसल, हरहुना( अर्ली वैरायटी) किस्म के धान की कटाई हो चुकी है। धान खेत से किसानों के घर पहुंच चुकी है। लेकिन वे इसे सोसायटी में नहीं बेच सकते। क्योंकि सरकार ने अभी तक खरीदी की तारीख तय नहीं की है। इससे किसान परेशान है। ऐसे में किसान अपनी उपज मंडी में कम कीमत में बेचने मजबूर है। उसे जल्दी कर्ज भी चुकाना है। मजदूरी भी देनी है। इसके अलावा दिवाली का त्योहार भी मनाना है।
जानकारी के मुताबिक, मंडी में इस वक्त 1500 से 1800 में धान की खरीदी हो रही है। जबकि सोसायटी में प्रति क्विंटल 2500 रुपए समर्थन मूल्य मिलता।
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25 को उपसमिति की बैठक
धान खरीदी के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इसमें खरीदी तैयारी की समीक्षा की जाएगी। इसमें खरीदी मात्रा और तारीख तय किए जाने की संभावना है। इस समिति में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम और उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल सदस्य हैं।
15 नवंबर से खरीदी
राज्य के किसान एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग कर रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन ने 8 नवंबर से खरीदी शुरू करने की मांग की है। 15 नवंबर से पहले खरीदी शुरू नहीं हो पाएगी। बता दें कि पिछले साल भी एक दिसंबर से खरीदी शुरू हुई थी।
मुख्यमंत्री ने 1 नवंबर से न्याय की दूसरी किस्त देने की घोषणा
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर के मुरिया दरबार में 1 नवंबर से राजीव गांधी किसान न्याय योजना की दूसरी किस्त देने की घोषणा की। योजना के तहत करीब 22 लाख किसानों को लगभभ 1500 करोड़ रुपए दिया जाएगा। सरकार इस साल किसानों को कुल 5597 करोड़ रुपए देगी। पहली किस्त मई में वितरित की गई थी।
दूसरी किस्त से धान खरीदी में देरी की भरपाई
किसानों का कहना है कि सरकार जरूर न्याय योजना की दूसरी किस्त दे रही है। लेकिन वे धान खरीदी में जानबूझकर देरी कर रही है। इसे छिपाने के लिए यह सब की जा रही है। सही समय पर खरीदी किसानों का हक है। वहीं छोटे किसानों को इससे कोई फायदा नहीं होगा। वे धान बेचकर त्योहार मनाएंगे।
किसानों को नुकसान
सोसायटी में जल्दी खरीदी नहीं होने से किसानों को कई नुकसान होगा। जो इस प्रकार है-
- धान सूख जाएगा। वजन में कमी आएगी
- मंडी में बेचने से कम कीमत मिलेगी
- न्याय योजना के लाभ से चूक जाएंगे
- मंडी में बिक्री होने से सरकार पर भार कम होगा
- मिलिंग खर्च में बचत से सरकार को फायदा
- समय कम मिलने से सोसायटी में मारामारी की नौबत
- टोकन सिस्टम शुरू होने से बड़े किसानों को करना होगा इंतजार
- रबी फसल तैयारी के समय में बर्बादी
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