चिटफंड निवेशकों को मिली राशि, 3 लाख जमा किया था, दूसरी किस्त में मिला 30 हजार, लेकिन जनता क्यों लूटी, जानें इस खबर में...

चिटफंड निवेशकों को मिली राशि, 3 लाख जमा किया था, दूसरी किस्त में मिला 30 हजार, लेकिन जनता क्यों लूटी, जानें इस खबर में... रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये आयोजित राजनांदगांव जिले के चिटफंड कंपनियों के निवेशकों को 2 करोड़ 46 लाख की राशि वापस की। यह राशि चिटफंड कंपनियों के कुर्क की गई संपत्ति को नीलाम कर वसूल की  गई है।

निवेशकों को 7 करोड़ 32 लाख रुपए वापस

बता दें कि इससे पहले राजनांदगांव में 16796 निवेशकों को 7 करोड़ 32 लाख रुपए वापस किये गए थे। राजनांदगांव जिले में अब तक 9 करोड़ 78 लाख रुपए की राशि निवेशकों को वापस लौटाई जा चुकी है। इस मौके पर मुख्यमंत्री निवास पर कार्यालय में कलेक्टर राजनांदगांव तारण प्रकाश सिन्हा, एसपी डी श्रवण भी उपस्थित थे।

कलेक्टर ने क्या कहा

कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा ने बताया कि आवेदनों के आधार पर 462 कंपनियों की सूची तैयार की है। जिसके आधार पर 787 प्रकरण तैयार की है। कंपनियों की जमीन कुर्क की जा रही है। 28 अक्टूबर को शुभ साईं लिमिटेड की 10 एकड़ जमीन कुर्क की गई है। जिला न्यायालय को फाइनल आर्डर के लिए भेजा गया है। वहीं दिसंबर के पहले सप्ताह में डोंगरगांव मटिया की 2 एक जमीन, राजनांदगांव हरदुवा की आधा एकड़ जमीन नीलाम करने जा रहे है। इस प्रकार 5 एकड़ जमीन की नीलामी से जो राशि प्राप्त होगी, उसी को निवेशकों को वापस करेंगे। ये सब निवेशक के आवेदन के आधार पर वापस किया जाएगा। एसपी ने बताया मामले में कार्रवाई की जा रही है। एक केस में सजा भी हुआ है।

निवेशकों का दर्द लाखों जमा कर फंसे, वापसी हजारों में

शारदा बाई और उनके पति ने बताया कि 2012 में 5 लाख रुपए जमा की थी। 5 साल में राशि दोगुनी करने का वादा किया गया था। सभी रुपए डूब गए थे। खाते में 50 हजार रुपए आया। पुन्नूराम साहू खैरागढ़ निवासी ने बताया कि 50 हजार का डेढ़ लाख करने का लालच दिया था। कंपनी वाले फरार हो गए। अब सरकार ने पहली किस्त के रूप में 15 हजार रुपए वापस किया है। बाहरू राम ने बताया कि 3 लाख रुपया 2014 में जमा किया था। रूपए वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दिया था। खाता में पहली किस्त में 90 हजार रुपए और दूसरे में 30 हजार आने की बात कही जा रही है। कलीराम के बेटे ने बताया कि 2 लाख 16 हजार रुपए जमा किया था। पहला किस्त 65, दूसरा 21 हजार रुपए वापस मिला है। रुपए वापस मिलने की उम्मीद नहीं थी।

राजनांदगांव में ही पहली वापसी क्यों

निवेशकों समेत प्रदेशवासियों के मन में यही सवाल है कि राजनांदगांव जिले के निवेशकों की राशि पहले क्यों लौटाई जा रही है। अन्य जिले के निवेशकों को क्यों नहीं लौटाई जा रही है। इसका जवाब सीधा सा है। प्रदेश के बड़े भाजपा नेता इसी जिले से है। कांग्रेस ने बड़े नेता पर चिटफंड कंपनी के दफ्तर उद्घाटन करने का आरोप लगाया था। इसलिए ही लगातार दो बार इस जिले के निवेशकों की राशि वापस हुई है। 

छत्तीसगढ़ के लोगों को कैसे फंसाया जाल में

भाजपा शासन काल में छत्तीसगढ़ के भोले भाले जनता को उन्हीं के जान पहचान वाले लोगों के जरिये जांल में फंसाया गया। पहले लोगों को अच्छी आमदनी का लालच देकर एजेंट बनाया। फिर गांव वाले रिश्तेदार और दोस्तों से राशि जमा करने कहा गया। कम समय में रुपए दोगुनी होने का सपना दिखाया गया। इसके एवज में उन्हें अच्छा कमीशन भी मिला है। कई चिटफंड कंपनी ने प्रदेश में अरबों रुपए लूटकर फरार हो गई।

चिटफंड की खबर वर्तमान सरकार को थी!

ऐसा नहीं की वर्तमान भाजपा सरकार को इसकी खबर नहीं थी। लेकिन सब कुछ संरक्षण में चलता रहा। ऐसा लोगों का आरोप है। उस समय विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने भी कुछ नहीं उठाया। ऐसे कैसे हो सकता है कि जनता लूटी जा रही हो और किसी को कानों कान खबर न हो। आरोप है कि सब कुछ मिली भगत से चल रहा था। प्रदेश के मीडिया ने भी अपनी मुंह बंद कर रखा था। नासमझ जनता लूटती रही और सत्ता पक्ष, विपक्ष और मीडिया तमाशा देखती रही। जनता बेवकूफ होती है, ये साबित कर दिया। इसी तरह की लूट ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में हुई। लेकिन न तो लूट के समय विपक्ष ने आवाजा उठाई न ही मीडिया ने।  तात्कालीन गृहमंत्री पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। तात्कालीन सरकार इसके लिए दोषी क्यों नहीं। ये भी बड़ा सवाल है।

अब बिजली बिल में खेल

छत्तीसगढ़ में अभी बिजली बिल के नाम पर लूट मची है। हाफ बिजली बिल किस हिसाब से आ रही है किसी को पता नहीं है। रीडिंग कब होती है, ये पता नहीं। बिना रीडिंग के ही बिल आ जा रही है। मान लो हाफ बिजली बिल योजना के पहले किसी उपभोक्ता का 300 रुपए बिला आ रहा था। योजना के बाद शुरुआत में बिल 150 रुपए आया। लेकिन अचानक यही बिल हाफ बिल घटा के 6 सौ रुपए हो गया। ऐसे कैसे हो सकता है। जो उपभोक्ता पहले 300 रुपए का बिजली जला रहा था, उसका अब 900 रुपए का बिल कैसे आ सकता है। उनकी खपत अचानक कैसे बढ़ सकती है। इस खेल को समझने की जरूरत है। इस कारण जानबूझकर अतिरिक्त सुरक्षा निधि ली गई। वहीं इस पर सरकार का कहना है कि लोगों ने ज्यादा खपत की। इसलिए अतिरिक्त सुरक्षा निधि लेना पड़ा।  इसलिए जागरूक बने। अपने स्थानीय नेता जैसे भाजपा मंडल अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष से सवाल करिये। स्थानीय विधायकों का स्वागत करने के पहले सवाल पूछिये। और लूटने और बेवकूफ बनने से बचे। Hindi News के लिए जुड़ें हमारे साथ इस वॉट्सएप ग्रुप में…( इसे क्लिक कीजिए) बेरोजगारों को धोखा देना बंद करो भूपेश सरकार! इन नौकरियों के लिए आवेदन करने और परीक्षा की तारीख बढ़ाई…, जानें असल खेल… सरपंचों का मानदेय बढ़ेगा, जनपद और जिला पंचायत अध्यक्ष का भी बढ़ा, पंचायती राज सम्मेलन में सीएम भूपेश बघेल ने की बड़ी घोषणा देखिए वीडियो- सरपंच-पंच, जिला अध्यक्ष का मानदेय घोषणा… पेट्रोल-डीजल के दाम घटे, लेकिन नामात्र, सीएम भूपेश ने VAT कम करने की घोषणा की… एयर स्‍ट्राइक के हीरो अभिनंदन वर्धमान को वीर चक्र, पाकिस्तान का F-16 विमान किया था ध्वस्त Airtel का प्रीपेड प्लान हुआ महंगा, ग्राहकों पर महंगाई की मार महिला नगर सैनिक जॉब, 1715 पदों पर होगी भर्ती… बिजली बिल में अतिरिक्त सुरक्षा निधि आधी करने का फैसला, क्या ये असल में राहत है, जानें इस खबर में… Our players have understood their roles and responsibilities: Dhoni on turnaroun