गणितज्ञ निखिल श्रीवास्तव को सिप्रियन फोयस पुरस्कार, फेमस प्रॉब्लम 1959 को किया हल
डेस्क। प्रतिष्ठित भारतीय-अमेरिकी गणितज्ञ निखिल श्रीवास्तव को ऑपरेटर थ्योरी के पहले सिप्रियन फोयस पुरस्कार के लिए नामिक किया गया है। वे बर्कले के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं। उन्होंने गणित की फेमस प्रॉब्लम 1959 को हल करने सफलता मिली है।
बता दें कि इस पुरस्कार के लिए निखिल श्रीवास्तव के साथ संयुक्त रूप से एडम मार्कस और डिनियल स्पीलमैन दो अन्य को भी चुना गया है। यह पुरस्कार अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी द्वारा प्रदान किया जाता है।
एडम मार्कस स्विट्जरलैंड के इकोले पॉलीटेक्निक फेडरेल डी लॉजेन में कॉम्बिनेटोरियल एनालिसिस के अध्यक्ष हैं। जबकि वहीं डैनियल स्पीलमैन कंप्यूटर विज्ञान के स्टर्लिंग प्रोफेसर, सांख्यिकी और डेटा विज्ञान के प्रोफेसर और इसके साथ ही गणित के प्रोफेसर हैं।
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि इस पुरस्कार को उनके मौलिक कार्य को मान्यता प्रदान करेगा, जिसमें मैट्रिसेस के विशिष्ट बहुपद को समझने के तरीकों को नए रूप में विकसित किया गया है। इनमें मुख्य रूप से इटिरेटिव स्पार्सीफिकेशन विधि (बैट्समैन के सहयोग से भी) और बहुपदों को जोड़ने की विधि यानी इंटरलेसिंग पोलीनोमियल्स विधि शामिल है।
अमेरिकन मैथमेटिकल सोसायटी ने कहा कि एक साथ इन विचारों ने कई अनुप्रयोगों के लिए के बेहद शक्तिशाली टूलकिट प्रदान किया है। विशेष रूप से तीनों के सफलता पत्र ‘इंटरलेसिंग परिवार, मिश्रित विशेषता बहुपद और कैडिसन-सिंगर समस्या’ (गणित के इतिहास, 2015) में, जो प्रसिद्ध फ़र्श समस्या को हल करता है। अमेरिकन मैथमैटिकल सोसाइटी ने कहा कि ऑपरेटर सिद्धांत 1959 में रिचर्ड कैडिसन और इसाडोर सिंगर द्वारा तैयार किया गया।
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