विश्व बैक ने भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट को रखा बरकरार, लेकिन ग्लोबल ग्रोथ रेट को किया कम

विश्व बैक ने भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट को रखा बरकरार, लेकिन ग्लोबल ग्रोथ रेट को किया कम नई दिल्ली। विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की ग्लोबल ग्रोथ रेट को कम किया है। जबकि जीडीपी ग्रोथ को बरकरार रखा है। वहीं भारत सरकार ने जीडीपी वृध्दि का अनुमान लगाया है। अब इन दो बड़े अनुमान में तकरीबन एक फ़ीसदी का अंतर देखा जा रहा है। विश्व बैंक (IBRD) के जीडीपी ग्रोथ के अनुमान 8.3 फ़ीसदी के करीब हैं, जबकि भारत सरकार के एनएसओ (National Statistical Organisation) के आंकड़े कहते हैं कि चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 9.2 फ़ीसदी रह सकती है। (हमारे वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए नीचे दिए फोटो को क्लिक कीजिए) विश्व बैंक (World Bank) ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2022 के लिए भारत के जीडीपी ग्रोथ रेट (India GDP growth Rate) के अनुमान को 8.3 फीसदी पर बरकरार रखा है। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2024 के लिए भारत के अपने अनुमान को बढ़ाकर 8.7 फीसदी और 6.8 फीसदी कर दिया है। विश्व बैंक ने मंगलवार को ग्लोबल इकनॉमिक प्रॉस्पेक्टस रिपोर्ट (Global Economic Prospectus Report) में भारत की जीडीपी को लेकर यह अनुमान जताया है। बैंक का यह अनुमान ऐसे वक्त आया है, जब कुछ दिन पहले ही भारत सरकार ने अपने पहले आधिकारिक अनुमान में वित्त वर्ष 2022 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 9.2 फीसदी रहने की बात की है।

पिछले साल के गिरावट का असर

भारत सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (NSO) ने पिछले शुक्रवार को जारी आंकड़े में देश की विकास दर वित्त वर्ष 2021-22 में 9.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में कोरोना महामारी और संक्रमण रोकने के लिए लगाए गए सख्त लॉकडाउन की वजह से भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट में 7.3 फीसदी की गिरावट आई थी। पिछले वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ का बेस कमजोर रहने की वजह से इस बार विकास दर बढ़ी हुई दिख रही है। एनएसओ का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2021-22 के लिए जताए गए 9.5 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान से कुछ कम है।

ग्लोबल ग्रोथ रेट में कमी

विश्व बैंक ने बताया कि साल 2021 में ग्लोबल ग्रोथ रेट 5.5 फीसदी रही है। हालांकि साल 2022 में इसमें गिरावट आने के साफ़ संकेत दिख रहे हैं और यह 4.1 फीसदी रह सकती है। साल 2023 में यह और घटकर 3.2 फीसदी पर आ सकती है। वर्ल्ड बैंक ने इसके पीछे पेंट-अप डिमांड के धीमा पड़ने और सरकारों की तरफ से महामारी में बड़े पैमाने पर जारी किए वित्तीय उपायों के असर के कम पड़ने को वजह बताया है।

एनएसओ का बयान

एनएसओ ने भारत की जीडीपी के लिए कहा, "कांस्टेंट प्राइस पर भारत की रियल जीडीपी साल 2021-22 में 147.54 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इससे पहले 31 मई 2021 को साल 2020-21 के लिये जारी प्रोविजनल एस्टीमेट में यह 135.13 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह 2021-22 में रियल जीडीपी की ग्रोथ रेट 9.2 फीसदी रहने का अनुमान है। एक साल पहले साल 2020-21 में इसमें 7.3 फीसदी की गिरावट आयी थी।’’

जीडीपी से देश की अर्थव्यवस्था का अंदाजा

ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं। जीडीपी किसी देश के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा पैमाना है। अधिक जीडीपी का मतलब यह है कि देश की आर्थिक बढ़ोतरी हो रही है। अगर जीडीपी बढ़ती है तो इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था ज्यादा रोजगार पैदा कर रही है। इसका यह भी मतलब है कि लोगों की आमदनी बढ़ रही है। इससे यह भी पता चलता है कि किस क्षेत्र में विकास हो रहा है और कौन सा क्षेत्र आर्थिक तौर पर पिछड़ रहा है। लिंक क्लिक कर पढ़े –मशहूर गायिका लता मंगेशकर कोरोना पॉजिटिव, अस्पताल में भर्ती छत्तीसगढ़ मेें बारिश इतने दिनों तक होगी, मौसम विभाग ने दी चेतावनी, जानिए वैज्ञानिकों ने क्या कहा छत्तीसगढ़ : भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना, इस दिन जारी होगी पहली किस्त Our players have understood their roles and responsibilities: Dhoni on turnaroun