छत्तीसगढ़ मे आज छेरछेरा, इसे क्यों मनाया जाता है, जानिए

छत्तीसगढ़ मे आज छेरछेरा, इसे क्यों मनाया जाता है, जानिए रायपुर। छत्तीसगढ़ में छेरछेरा एक खास पर्व है। जिसे आज उत्साह से मनाया जा रहा है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग अन्न लेने सुबह से निकले हुए हैं। घर की माताएं सभी को अन्न दान कर रही है। घरो में छेरछेरा माई कोठी के धान ल हेर-हेरा गूंज रहा है। आखिर प्रदेश में इस त्योहार की शुरुआत कब हुई। आखिर इसे क्यों मनाया जाता है। आइये जानें इस खबर में..   (हमारे वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए नीचे दिए फोटो को क्लिक कीजिए) छेरछेरा क्या (chherachhera kya hai), छेरछेरा क्यों मनाया जाता है कौशल प्रदेश के राजा कल्याण साय ने मुगल सम्राट जहांगीर की सल्तनत में रहकर राजनीति और युद्ध कला की शिक्षा ली थी। वह करीब आठ साल तक राज्य से दूर रहे। शिक्षा लेने के बाद जब वे रतनपुर आए तो प्रजा को इसकी खबर लगी। खबर मिलते ही लोग राजमहल की ओर चल पड़े। छत्तीसगढ़ कोरोना अपडेट : 3963 नए मरीज मिले, 7 की मौत, इन जिलों में ज्यादा केस छत्तीसगढ़ के सभी राजा कौशल नरेश का स्वागत करने के लिए रतनपुर आने लगे। राजा 8 साल बाद वापस आए थे, इस बात से सारी प्रजा बहुत उत्साहित थी। हर कोई लोक-गीतों और गाजे-बाजे की धुन पर नाच रहा थे। राजा की अनुपस्थिति में उनकी पत्नी रानी फुलकैना ने 8 साल तक राजकाज संभाला था। इतने समय बाद अपने पति को देख कर वह बहुत खुश थी। उन्होंने सोने-चाँदी के सिक्के प्रजा पर लूटना चालू किया। राजा कल्याण साय ने उपस्थित राजाओं को निर्देश दिए कि आज के दिन को हमेशा त्योहार के रूप में मनाया जाएगा, ऐसे सभी राज्य में सूचित कर दिया जाए; यह शुभ अवसर हमेशा के लिए यादगार बना रहे और इस दिन किसी के घर से कोई खाली हाथ नहीं जाएगा।  एक और जनश्रुति है कि एक समय धरती पर घोर अकाल पड़ा- यह अन्न, फल, फूल व औषधि नहीं उपज पाई। इससे मनुष्य के साथ जीव-जंतु भी हलाकान हो गए। सभी ओर त्राहि-त्राहि मच गई। ऋषि-मुनि व आमजन भूख से थर्रा गए। तब आदि देवी शक्ति शाकंभरी को पुकारा गया।

शाकंभरी देवी ने भूख दूर की

शाकंभरी देवी प्रकट हुई और अन्न, फल, फूल व औषधि का भंडार दे गई। इससे ऋषि-मुनि समेत आमजनों की भूख व दर्द दूर हो गया। इसी की याद में छेरछेरा मनाए जाने की बात कही जाती है। ऐसे कहते है त्योहार के दिन शाकंभरी देवी हर माता में उपस्थित होती है। लोक परंपरा के अनुसार, पौष महीने की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष छेरछेरा का त्योहार मनाया जाता है। गांव के युवक घर-घर जाकर डंडा नृत्य करते हैं और अन्न का दान मांगते हैं। धान मिंसाई हो जाने के चलते गांव में घर-घर धान का भंडार होता है, जिसके चलते लोग छेर छेरा मांगने वालों को दान करते हैं। ‘छेर छेरा ! माई कोठी के धान ला हेर हेरा !’ यही आवाज़ आज प्रदेश के ग्रामीण अंचल में गूंजी और दान के रूप में धान और नगद राशि बांटी गई। राज्य का राजा घर आये या खेतो की फसल, एक तरह से जब खुशी आपके दरवाज़े दस्तक दे यही है छेरछेरा पर्व। छत्तीसगढ़ : स्वास्थ्य विभाग में 202 पदों पर होगी भर्ती, देखें डिटेल CGPSC : 49 पदों पर होगी भर्ती, इस तारीख तक करें आवेदन छत्तीसगढ़ : भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना, इस दिन जारी होगी पहली किस्त Our players have understood their roles and responsibilities: Dhoni on turnaroun