रायपुर।मुख्यमंत्री विष्णु
देव
साय
ने
आज
मंत्रालय महानदी
भवन
में
श्रम
विभाग
के
कार्यों और
योजनाओं की
उच्च
स्तरीय
समीक्षा करते
हुए
अधिकारियों को
निर्देश दिए
कि
मैदानी
अमला
पूरी
प्रतिबद्धता के
साथ
श्रमिकों तक
योजनाओं का
लाभ
पहुंचाना सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि
योजनाओं का
वास्तविक प्रभाव
तभी
दिखाई
देगा,
जब
उनका
लाभ
अंतिम
व्यक्ति तक
पहुंचे
और
जमीनी
स्तर
पर
उनका
प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।
इस
अवसर
पर
श्रम
मंत्री
श्री
लखन
देवांगन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री
साय
ने
कहा
कि
प्रधानमंत्री श्री
नरेंद्र मोदी
के
नेतृत्व में
देश
में
श्रमिकों के
हित
में
व्यापक
पहल
हुई
है
और
चार
नई
श्रम
संहिताएं लागू
की
गई
हैं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ में
मजदूरी
संहिता
2019, औद्योगिक संबंध
संहिता
2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता
2020 और
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं
कार्य
दशाएं
संहिता
2020 का
प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने
के
निर्देश दिए,
ताकि
श्रमिकों को
सुरक्षित, संरक्षित और
सम्मानजनक कार्य
वातावरण मिल
सके।
मुख्यमंत्री श्री
साय
ने
कहा
कि
श्रम
विभाग
एक
अत्यंत
महत्वपूर्ण विभाग
है,
जो
बड़े
पैमाने
पर
श्रमिकों के
जीवन
में
सकारात्मक बदलाव
ला
सकता
है।
उन्होंने अधिकारियों को
निर्देश दिए
कि
योजनाओं के
प्रभावी क्रियान्वयन के
साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का
औचक
निरीक्षण भी
तकनीक
के
माध्यम
से
किया
जाए,
ताकि
श्रमिकों के
अधिकारों की
सुरक्षा सुनिश्चित हो
सके।
राज्य
सरकार
के
इन
प्रयासों से
छत्तीसगढ़ में
श्रमिकों के
सामाजिक और
आर्थिक
सशक्तिकरण को
नई
दिशा
मिल
रही
है।
इस
अवसर
पर
मुख्यमंत्री श्री
साय
ने
श्रमिकों को
घर
बैठे
रोजगार
की
जानकारी सहज
उपलब्ध
कराने
के
उद्देश्य से
"ई-श्रम साथी" मोबाईल एप्लीकेशन छत्तीसगढ़ डिजिटल
लेबर
चौक
का
शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा
कि
श्रमिकों की
मेहनत
देश
और
प्रदेश
की
अर्थव्यवस्था का
मजबूत
आधार
है,
इसलिए
उनके
योगदान
का
सम्मान
और
उनके
हितों
की
रक्षा
सर्वोच्च प्राथमिकता है।
समीक्षा बैठक
में
श्रम
विभाग
की
संरचना,
श्रमायुक्त संगठन,
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं
सुरक्षा व्यवस्था तथा
तीनों
प्रमुख
मंडलों
के
कार्यों की
विस्तार से
समीक्षा की
गई।
प्रदेश
के
सभी
जिलों
में
श्रम
कार्यालयों के
माध्यम
से
योजनाओं के
क्रियान्वयन और
समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
करने
पर
भी
जोर
दिया
गया,
ताकि
श्रमिकों को
योजनाओं की
जानकारी और
उनका
लाभ
दोनों
सुनिश्चित हो
सके।
उल्लेखनीय है
कि
भवन
एवं
अन्य
सन्निर्माण कर्मकार कल्याण
मंडल
के
तहत
5 सितंबर
2008 से
अब
तक
33 लाख
14 हजार
से
अधिक
श्रमिक
पंजीकृत किए
जा
चुके
हैं।
मंडल
द्वारा
26 योजनाएं संचालित की
जा
रही
हैं
तथा
60 श्रमिक
वर्ग
अधिसूचित हैं।
एक
प्रतिशत उपकर
(सेस)
से
वर्ष
2025-26 में
315 करोड़
रुपये
प्राप्त हुए,
जबकि
मंडल
गठन
से
अब
तक
कुल
2,808 करोड़
रुपये
का
उपकर
संग्रहित हुआ
है।
मार्च
2026 तक
2,558 करोड़
रुपये
विभिन्न योजनाओं में
व्यय
किए
जा
चुके
हैं।
छत्तीसगढ़ में
श्रमिक
कल्याण
के
लिए
कई
महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित हैं,
जिनमें
मिनीमाता महतारी
जतन
योजना,
मुख्यमंत्री नोनी
सशक्तिकरण योजना,
नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना,
निर्माण श्रमिक
मृत्यु
एवं
दिव्यांग सहायता,
सियान
सहायता,
नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा
सहायता,
आवास
सहायता
योजना,
निःशुल्क कोचिंग
सहायता
तथा
दीदी
ई-रिक्शा सहायता योजना
प्रमुख
हैं।
अटल
उत्कृष्ट शिक्षा
योजना
के
तहत
कक्षा
6वीं
में
हर
वर्ष
100 बच्चों
का
चयन
मेरिट
के
आधार
पर
किया
जा
रहा
है।
वर्तमान में
प्रदेश
के
31 जिलों
के
95 विद्यार्थी 8 जिलों
के
14 विद्यालयों में
अध्ययनरत हैं,
जिसे
इस
शैक्षणिक सत्र
से
सीटें
बढ़ाकर
200 कर
दिया
गया
है।छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य
सामाजिक सुरक्षा मंडल
और
श्रम
कल्याण
मंडल
द्वारा
भी
विभिन्न योजनाओं का
संचालन
किया
जा
रहा
है।
श्रम
कल्याण
मंडल
के
तहत
14 योजनाएं संचालित हैं
और
वर्ष
2025-26 में
5.21 करोड़
रुपये
का
बजट
प्रावधान किया
गया
है।
शहीद
वीरनारायण सिंह
श्रम
अन्न
योजना,
श्रम
सम्मेलन कार्यक्रम और
मोबाइल
कैंप
के
माध्यम
से
श्रमिकों तक
योजनाओं की
पहुंच
सुनिश्चित की
जा
रही
है।
डिजिटल
सेवाओं
के
विस्तार पर
जोर
देते
हुए
मुख्यमंत्री श्री
साय
ने
ई-केवाईसी के माध्यम से
हितग्राहियों की
सही
पहचान
सुनिश्चित करने
के
निर्देश दिए।
वर्तमान में
55 प्रतिशत सत्यापन पूरा
हो
चुका
है
और
शेष
कार्य
प्रगति
पर
है।
उन्होंने “मुख्यमंत्री श्रमिक
सहायता
केंद्र”
जैसे
नवाचारों को
और
प्रभावी बनाने
पर
भी
बल
दिया।
इस
अवसर
पर
मुख्य
सचिव
श्री
विकासशील, मुख्यमंत्री के
प्रमुख
सचिव
श्री
सुबोध
सिंह,
श्रम
विभाग
सचिव
श्री
हिमशिखर गुप्ता,
मुख्यमंत्री के
विशेष
सचिव
श्री
रजत
बंसल
सहित
श्रम
विभाग
के
वरिष्ठ
अधिकारी गण
उपस्थित थे।
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