दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) दो दिवसीय भूटान दौरे पर हैं। रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट पर इस यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि यह दौरा भारत-भूटान के बीच दोस्ती और साझेदारी को नई ऊर्जा देगा।
पिछले 11 वर्षों में यह प्रधानमंत्री मोदी का चौथा भूटान दौरा है।
इससे स्पष्ट होता है कि भारत और भूटान के रिश्ते विश्वास, सहयोग और मजबूत राजनीतिक संबंधों पर आधारित हैं। अब सवाल यह है कि भूटान - भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है और इस दौरे का मुख्य एजेंडा क्या है?
इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत होगी। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम पुनात्संगछू-2 जलविद्युत परियोजना (Punatsangchhu-II Hydropower Project) का उद्घाटन है। यह परियोजना भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग का प्रमुख स्तंभ मानी जा रही है। इसके शुरू होने से भूटान को बिजली निर्यात से आय बढ़ेगी, जबकि भारत को स्वच्छ और स्थायी जलविद्युत ऊर्जा की विश्वसनीय आपूर्ति मिलेगी।
चौथे राजा का 70वां जन्मदिन मना रहा भूटान
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भूटान अपने चौथे राजा जिग्मे सिंगये वांगचुक का 70वां जन्मदिन मना रहा है। इस अवसर ने यात्रा को विशेष सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व दे दिया है। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत और भूटान के संबंध भरोसे, समझ और सद्भाव पर आधारित हैं। उन्होंने इसे भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का आदर्श उदाहरण बताया।
भारत और भूटान के रिश्तों की जड़ें सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्तर पर गहरी हैं। दोनों देशों के बीच बौद्ध धर्म एक महत्वपूर्ण सेतु की तरह है। भारत से भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष (Piprahwa Relics) को पहले भूटान भेजा गया था, जिसे भूटान के नागरिकों ने अत्यंत श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव के साथ देखा। यह साझा आध्यात्मिक धरोहर दोनों देशों की भावनात्मक निकटता को दर्शाती है।
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